उपलब्धि: बोड़ाम के शांतनु को झारखंड सरकार से 1 करोड़ की छात्रवृत्ति, 12 को जाएंगे लंदन
गोल्ड मेडल हाथ में, शांतनु मोदक
Jamshedpur: पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम प्रखंड अंतर्गत एक छोटे से गांव बंगोई से निकलकर लंदन की सर्वोत्तम और वैश्विक स्तर पर दूसरे एवं तीसरे स्थान पर प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय क्रमशः इंपेरियल कॉलेज लंदन एवं वारविक बिजनेस स्कूल तक पहुंचने वाले छात्र शान्तनु मोदक की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि अटूट संकल्प, संघर्ष और सपनों की है। एक साधारण किसान निर्मल मोदक के छोटे बेटे शान्तनु का बचपन साधारण आर्थिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों में बीता, फिर भी पिता ने पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। पिता पर दो बेटों एवं एक बेटी की पढ़ाई समेत पूरे परिवार का खर्च उठाना आसान नहीं था। लेकिन बेटे की पढ़ाई जिद और उनके सपनों को पूरा करने के लिए पिता भी कभी पीछे नहीं हटे। जिस खेतिहर जमीन से गुजारा करते थे उसका एक हिस्सा भी बेच दिया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ शांतनु मोदक, रांची में चयन होने के पश्चात (फाइल फोटो)
शान्तनु ने बचपन से ही समझ लिया था कि शिक्षा ही जीवन बदलने का रास्ता है। आज लंदन के दो प्रतिष्ठित विश्विवद्यालयों से बुलावा पाने वाले चुनिंदा भारतीय छात्रों में शामिल हैं, मगर यह सफर एक कामयाबी की खबर नहीं है, यह एक ऐसे सपने की कहानी है जिसे गरीबी, असफलताएं और सीमाएं भी नहीं तोड़ सकीं। वे हमेशा कक्षा के श्रेष्ठ छात्रों में रहे और आदिवासी हाइस्कूल बोड़ाम से मैट्रिक में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर परिवार व गांव का नाम रोशन किया। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें जमशेदपुर भेजा गया, जो परिवार के लिए एक बड़ा फैसला था। आगे चलकर शान्तनु ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एनआईटी दुगार्पुर से एमटेक किया। उनका सपना वैज्ञानिक बनने का था। उन्होंने बीएआरसी और इसरो जैसी बड़ी संस्थाओं की वैज्ञानिक परीक्षाएं भी पास कीं, लेकिन अंतिम चयन न हो पाने के बावजूद कभी हार नहीं मानी। वे एनआईटी इलाहाबाद में फैकल्टी बने, मैकेनिकल डिपार्टमेंट में और फिर आन एकेडमी जैसे राष्ट्रीय मंच पर टॉप एजुकेटर के रूप में गेट एवं आईईएस परीक्षा के लिए हज़ारों छात्रों को पढ़ाया। इसके बाद उन्होंने कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी फैकल्टी के तौर पर काम किया, लेकिन मन में अब भी एक बड़ा सपना पल रहा था, वैश्विक स्तर पर खुद को साबित करने का। इस वर्ष शान्तनु का सपना पूरा हुआ, जब उन्हें इंपेरियल कॉलेज लंदन और वारविक बिजनेस स्कूल में बिजनेस एनालिटिक्स कार्यक्रम के लिए प्रवेश का ऑफ़र मिला।
उन्होंने राज्य की सबसे प्रतिष्ठित ‘ओवरसीज़ स्कॉलरिशप’ भी प्राप्त की, जिसके तहत झारखंड सरकार ने 1 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की। यह उनके विदेश में पढ़ाई के सभी खर्चे को कवर करती है। पूरे राज्य से हर वर्ष ओबीसी से केवल 6 छात्रों को इस योजना के तहत चुना जाता है और शान्तनु उन चुनिंदा प्रतिभाओं में से एक हैं। शान्तनु 12 सितंबर को फ्लाइट से लंदन के लिए रवाना होंगे और वहां इंपेरियल कॉलेज लंदन में दाखिला लेंगे। उनकी कहानी झारखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी। वे कहते हैं मैंने हालात को बहाना नहीं बनने दिया, बल्कि आत्मविश्वास की सीढ़ी बनाया।
Barabhum Darpan से विशेष बातचीत में शांतनु ने कहा कि झारखंड सरकार के 15 सदस्यीय बोर्ड ने जब उनसे सवाल किया तो उन्होंने साफ कहा कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद राज्य के विकास के लिए जब भी जरूरत महसूस होगी, सेवा देने के लिए तैयार रहेंगे। वे सिर्फ अपना नहीं बल्कि राज्य की जनता का विकास चाहते हैं और वह सरकार को वित्तीय प्रबंधन के मामले में जरूरी सलाह दे पाएंगे।





