83 वर्ष की उम्र में भी थिरकती उंगलियां: बांकुड़ा के खोल वादक आनंद दास की अद्भुत कला ने मोहा मन
कमलपुर के पंचम रात्रि हरिनाम संकीर्तन के अंतिम दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
Patamda : आमतौर पर 83 वर्ष की उम्र में लोग ठीक से चल-फिर भी नहीं पाते और उन्हें सहारे की आवश्यकता होती है। लेकिन पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले की फपसा कीर्तन मंडली से जुड़े वाद्य कलाकार आनंद दास अपनी अद्भुत खोल वादन कला से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। पटमदा प्रखंड के कमलपुर गांव स्थित सार्वजनिक हरि मंदिर में सोमवार से पंचम रात्रि अखंड हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया गया है, जिसमें छह कीर्तन मंडलियां अपनी प्रस्तुति दे रही हैं। इन मंडलियों में फपसा कीर्तन मंडली के वरिष्ठ कलाकार आनंद दास विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आनंद दास का नाम सुनते ही आसपास ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कमलपुर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन का श्रवण करने के साथ-साथ उनके जीवंत और ऊर्जा से भरपूर खोल वादन को देखने के लिए उत्साहित नजर आते हैं। शुक्रवार को संकीर्तन के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। 83 वर्ष की उम्र में भी उनकी तेज़ और लयबद्ध उंगलियों से निकलती धुनों ने दर्शकों को ऐसा मोहित किया कि लोग उनकी कला देखकर दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए।





