जमशेदपुर की सड़कों पर चौथा डहरे टुसू परब, परंपरा और बराबरी का सांस्कृतिक आंदोलन : दीपक
Jamshedpur: जमशेदपुर की सड़कों पर 4 जनवरी को डहरे टुसू परब का आयोजन किया जा रहा है। जमशेदपुर में आयोजित होने वाला यह चौथा कार्यक्रम है। इससे पूर्व इसके तीन आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं, जिनमें ग्रामांचल के साथ-साथ शहर के लोगों की व्यापक भागीदारी रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता दीपक रंजीत ने डहरे टुसू परब को लेकर उठने वाले भ्रमों पर कहा कि यह कोई नई या बनावटी परंपरा नहीं है, बल्कि यह टुसू के उसी मूल दर्शन की वापसी है, जो प्रकृति, अन्न और श्रम से जुड़ा हुआ है। जब टुसू मंच, मूर्ति और वीआईपी संस्कृति में सिमटने लगी, तब इसे फिर से आम लोगों के बीच लाने की ज़रूरत महसूस हुई। डहरे टुसू उसी ज़रूरत का जवाब है। उन्होंने आगे कहा कि टुसू को मूर्ति मान लेना लोक संस्कृति की सबसे बड़ी गलत व्याख्या है। टुसू डिनि है—धान है, जीवन है। इसे जड़ वस्तु नहीं, बल्कि चलती हुई सामूहिक प्रक्रिया के रूप में समझना होगा।
तैयारी बैठक में धनंजय महतो ने कहा कि आज टुसू मेलों में प्रतियोगिता और इनाम केंद्र में आ गए हैं, जिससे परब का असली स्वरूप पीछे छूटता जा रहा है। डहरे टुसू इस असमानता के खिलाफ खड़ा होता है। यहां न कोई छोटा है, न बड़ा—सभी एक साथ चलते हैं, यही टुसू की आत्मा है।”
उन्होंने कहा कि इस बार आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ा के साथ शामिल होंगे, ताकि शहर में लोकसंस्कृति की जीवंत तस्वीर उभर सके। मंगलवार को डोड़कासाईं, आसनबनी में आयोजित तैयारी बैठक की अध्यक्षता करते हुए बनमली महतो ने कहा कि यह केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक बराबरी और सांस्कृतिक शुद्धिकरण का प्रयास है। हमने तय किया है कि इस क्षेत्र से हजारों लोग पारंपरिक परिधान और वाद्य यंत्रों के साथ कार्यक्रम में शामिल होंगे, ताकि टुसू को उसके असली स्वरूप में अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
इसमें न कोई मंच है, न बैरियर और न ही वीआईपी संस्कृति। यह एक ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन है, जहां टुसू को देखा नहीं जाता, बल्कि जिया जाता है—खेतों में, पानी में, गीतों में और बराबरी से चलते लोगों के कदमों में। बैठक में दीपक रंजीत, बनमाली महतो, स्वपन कुमार महतो, जयप्रकाश महतो, संजय कुमार दास, कुमार राम टुडू, गोबिंद सिंह सरदार, रविंद्र नाथ टुडू, धनंजय महतो, चक्रधर महतो, मनोरंजन महतो, भवेश महतो, काशी राम दास एवं सागर पाल उपस्थित थे।





