विश्व मानवाधिकार दिवस पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश मृत्युंजय महतो ने कहा: मानव से मानुष बनने की है जरूरत

नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में सेमिनार आयोजित

Jamshedpur: झारखण्ड मानव अधिकार संघ जमशेदपुर द्वारा नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को नेताजी विश्वविद्यालय, मानगो स्थित सभागार में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया गया। इस अवसर पर भारत में “मानवाधिकारों के संरक्षण में ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग’ की सार्थकता एवं भूमिका” विषय पर संघ के जिला अध्यक्ष मनोज किशोर की अध्यक्षता में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। बतौर मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायाधीश मृत्युंजय महतो ने अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार के सभी अनुच्छेदों के अलावा भारतीय कानून के पहलुओं एवं दृष्टिकोण से मानव अधिकार के कानून के बारे में जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि उपरोक्त कानून के अलावा भी भारतीय कानून में आम नागरिकों के हितों के लिए बहुत सारे कानून बने हुए हैं। हमें सजगता एवं ईमानदारी पूर्वक उन कानून का अनुपालन करवाना चाहिए। आम नागरिक को अथवा न्यायिक या प्रशासनिक पदों पर बैठे लोग अपने कर्तव्यों का निर्वहन यदि ईमानदारी पूर्वक करें तो किसी भी मनुष्य के मानवाधिकार का हनन नहीं होगा। उन्होंने कवि गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर की 2 बीघा जमीन कविता की चर्चा करते हुए एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा है कि हमारे समाज में लोगों के बीच यह गलत धारणा है कि हम जो सोचते हैं वही अच्छा है जबकि ऐसी बात नहीं है। मुख्य अतिथि ने कहा कि 1986 में एक कानून पास करते हुए लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी बनाया गया और उसके बाद (सेवा) लोक अदालत में मुकदमा का निष्पादन होना शुरू हुआ। हर न्यायालय में स्थाई लोक अदालत की व्यवस्था है जिसमें पीएलवी के रूप में एक कड़ी कार्य करती है। उन्होंने उपभोक्ताओं को सचेत रहने की अपील करते हुए एमआरपी का मतलब मोल भाव करना बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी सामान को एमआरपी में नहीं खरीदना है बल्कि उससे कम में ही खरीदें। उन्होंने कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1987 की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी लोग मानव जरूर हैं उन्हें मानुष बनने की जरूरत है, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है।
बतौर विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद् एवं नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रभात कुमार पाणी ने प्रभावशाली तरीके से उपरोक्त विषय पर प्रकाश डालते हुए भारत में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सफलता एवं विफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा है सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर 1948 को ही अपनाया गया था। तभी से पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस 10 दिसंबर को प्रत्येक वर्ष पूरे विश्व में मनाया जाता है। इसी परिप्रेक्ष्य में आज का यह आयोजन है।
कोल्हान प्रमंडल के पूर्व आयुक्त एवं सेवानिवृत्त आईएएस बृजमोहन कुमार ने कहा की कोई भी कानून तब तक सार्थक नहीं होगा जब तक आम नागरिक खुद सचेत होकर अपने अधिकार की रक्षा के लिए अपना आवाज बुलंद नहीं करेगा। इस संदर्भ में उन्होंने अपना प्रशासनिक अनुभवों को विद्यार्थियों एवं मानवाधिकार के कार्यकर्ताओं के साथ साझा किया।
राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि मनोज कुमार सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार कानून एक महत्वपूर्ण कानून है जो आम मानव की अथवा नागरिक की व्यक्तिगत गरिमा की रक्षा करता है। उन्होंने इसे स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल करने की जरूरत बताई एवं इसके लिए झारखंड मानवाधिकार संघ जमशेदपुर के नेतृत्व में महामहिम राज्यपाल से मांग रखने का सुझाव दिया। उन्होंने संघ के केंद्रीय अध्यक्ष दिनेश कुमार कीनू के संघर्षों की कहानी की चर्चा करते हुए कहा कि उनके बिना मानवधिकार संघ अधूरा है। मनोज किशोर ने कहा “जन्म से लेकर मृत्यु तक, यहां तक कि मां की कोख में भ्रूण अवस्था से ही किसी भी मनुष्य की नैसर्गिक एवं प्रकृति प्रदत्त अधिकारों की रक्षा हेतु अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा सार्वभौम मानव अधिकार की घोषणा 10 दिसंबर 1948 को किया गया तथा इसे इस तिथि से अपनाया गया। लगभग 45 साल के उपरांत मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 को भारत सरकार ने पारित किया तथा इस तिथि से इसे भारत में अपनाया गया। इसमें कुल 30 अनुच्छेद हैं जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानव अधिकार की रक्षा पूरे विश्व में करता है।
इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक ग्रुप के छात्र-छात्राओं द्वारा झारखंड के पारंपरिक वेशभूषा में पारंपरिक रिवाज से अतिथियों का स्वागत करते हुए मंच तक ले जाया गया। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत की गई। तत्पश्चात सांस्कृतिक ग्रुप के छात्राओं द्वारा गणेश वंदना, साईं भजन एवं राष्ट्रीय गान किया गया। मंच पर आसीन अतिथियों को शॉल, बुके एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। व्याख्याता दीपिका पांडे ने स्वागत भाषण दिया। संघ के क्रियाकलापों एवं सेमिनार के विषय का विषय प्रवेश मनोज किशोर संघ के अध्यक्ष द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के परिसर में इस कार्यक्रम का आयोजन करने का उद्देश्य यह है विद्यार्थियों के बीच मानव सेवा एवं मानव अधिकार के क्रियान्वयन हेतु अभिरुचि जागृत हो तथा वे समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम का सफल संचालन दीपिका पांडे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मानवाधिकार संघ के सहसचिव शेखर सहाय ने दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संघ के केंद्रीय अध्यक्ष दिनेश कुमार कीनू, नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एमएम सिंह, कुलसचिव नागेंद्र सिंह, अवधेश कुमार गिरी, मधुकर आदि का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम में नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय के एमबीए, मास कम्युनिकेशन एवं के लगभग डेढ़ सौ विद्यार्थी शामिल हुए। इसके अलावा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ढाई सौ प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट एवं अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार से संबंधित अंकित सभी 30 अनुच्छेदों का 2026 का कैलेंडर वितरित किया गया, ताकि वर्ष भर उस कैलेंडर को देखकर सभी मानवाधिकार के प्रति हमेशा सजग रहें।





