पटमदा में 108 एंबुलेंस सेवा की खुली पोल, रास्ते में खत्म हुआ डीजल, दूसरी एंबुलेंस से मरीज को पहुंचाया गया एमजीएम
Patamda : झारखंड सरकार की 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। कहीं समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने से मरीजों की जान जा रही है, तो कहीं तकनीकी खामियों और ईंधन की कमी के कारण मरीजों का समय पर अस्पताल पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है।ताजा मामला गुरुवार को पटमदा क्षेत्र के आगुईडांगरा गांव का है, जहां डायरिया से पीड़ित महिला सावित्री सिंह (45 वर्ष) को बेहतर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल ले जाने के क्रम में रास्ते में ही 108 एंबुलेंस (वाहन संख्या JH01CJ-8238) का डीजल खत्म हो गया, जिससे वाहन टाटा–पटमदा मुख्य सड़क पर धूसरा गांव के समीप अचानक बंद हो गया।
चालक द्वारा जांच करने पर पता चला कि डीजल खत्म होने के कारण गाड़ी ने एयर ले ली थी, जिससे तकनीकी खराबी उत्पन्न हो गई। इसके बाद मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एमजीएम अस्पताल से दूसरी एंबुलेंस मंगानी पड़ी। करीब 15 किलोमीटर की दूरी मरीज ने दूसरी एंबुलेंस से तय की। परिजनों के अनुसार सावित्री सिंह को बुधवार से उल्टी और दस्त की शिकायत थी, जिससे गुरुवार तक उनकी हालत गंभीर हो गई। रिश्तेदार रविन्द्र सिंह द्वारा 108 सेवा पर कॉल करने के बाद बोड़ाम के लावजोड़ा पीएचसी में खड़ी एंबुलेंस आगुईडांगरा पहुंची। मरीज को लेकर निकली एंबुलेंस करीब 8 किलोमीटर चलने के बाद बीच रास्ते में ही बंद हो गई। लगभग एक घंटे बाद दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था हो सकी। एंबुलेंस चालक कामदेव महतो और टेक्नीशियन गणेश कौशल महतो ने बताया कि यह वाहन पहले जुगसलाई में था, जहां भी बार-बार खराब होता था। मरम्मत के अभाव में चलते-चलते बंद हो जाना इसकी आम समस्या है। उन्होंने बताया कि वाहन की बैटरी में अक्सर खराबी रहती है और इसे 10–15 दिन पहले ही जुगसलाई से लावजोड़ा पीएचसी भेजा गया था। गौरतलब है कि 25 दिसंबर को बोड़ाम प्रखंड के डांगरडीह गांव में सांस की बीमारी से पीड़ित एक महिला को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण जान गंवानी पड़ी थी। उस घटना के बाद जिला स्तर से यह एंबुलेंस बोड़ाम प्रखंड के लिए उपलब्ध कराई गई थी।





