वीर शहीद निर्मल महतो को श्रद्धांजलि, कुड़माली भाषा माध्यम के होनहार विद्यार्थियों का सम्मान
Patamda : झारखंड आंदोलन के जननायक वीर शहीद निर्मल महतो के 38 वां शहादत दिवस पर शुक्रवार को पटमदा के लोवाडीह, गागीबुरु, चड़कपाथर और बनडीह मोड़ में श्रद्धांजलि सभा और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। आदिवासी कुड़मी समाज और कुड़माली छात्र संघ के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम में सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक स्वाभिमान का संदेश गूंजता रहा। कुड़माली भाषा के माध्यम से माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 22 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। उन्हें पेन, कॉपी, किताब और पौधा भेंट कर प्रोत्साहित किया गया। आयोजकों ने बताया कि इसे मात्र शैक्षणिक सफलता नहीं बल्कि अपनी मातृभाषा, विरासत और सांस्कृतिक पहचान को आगे ले जाने की दिशा में युवाओं के योगदान का प्रतीक है।
कार्यक्रम में समाज के गणमान्य लोग विश्वनाथ महतो, जयराम महतो, विनय काड़ुआर, साधन टिड़ुआर, पूर्ण चन्द्र टिड़ुआर व बासुदेव महतो आदि मौजूद थे। समारोह को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता बिश्वनाथ महतो ने कहा कि निर्मल महतो केवल व्यक्ति नहीं विचार थे। उनकी शहादत झारखंड की आत्मा की पुकार है। युवाओं को चाहिए कि वे उनके विचारों को आत्मसात करें और उनके सपनों का झारखंड बनाने में योगदान दें। सरकार से मांग है कि निर्मल महतो को शहीद का दर्जा दे और उनकी हत्या की जांच एनआईए से कराई जाय।
जयराम महतो ने कहा कि शिक्षा को अपने करियर बनाने के साथ-साथ अपने सामाजिक परिवर्तन का औज़ार भी बनाया जाए। विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण हेतु पौधे सौंपे गए जिन्हें वे रोपकर उसकी देखभाल करेंगे यह केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी प्रस्ताव रखा कि गांव -गांव में ‘शहीद निर्मल विचार मंच’ की स्थापना कर युवाओं को संगठन, नेतृत्व और समाजसेवा की दिशा में प्रशिक्षित किया जाए।
“माल्यार्पण से बढ़कर ज़रूरी है कि उनके विचारों को हम अपने जीवन में उतारें,” यह संदेश सभी के बीच में जाना चाहिए।





