बोड़ाम के डांगडुंग में अधूरे बहुउद्देश्यीय भवन के हैंडओवर की शिकायत पर डीसी ने दिए जांच के आदेश
Patamda :बोड़ाम प्रखंड के डांगडुंगा गांव में बहुउद्देश्यीय भवन का निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर ठेकेदार द्वारा विभाग को हैंडओवर कर दिए जाने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। कई महीनों से स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे थे कि यह भवन तैयार होकर समुदायिक कार्यक्रमों, पारंपरिक आयोजन और जन-उपयोग की गतिविधियों के लिए उपलब्ध हो जाएगा, लेकिन भवन की वास्तविक स्थिति देखने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों की लागत वाली इस योजना का निर्माण अभी भी अधूरा है और इसे उपयोग के लायक बनाने का प्रयास नहीं किया गया है।
ग्रामीणों की शिकायत है कि भवन में न तो ग्रिल लगाई गई है और न ही दरवाज़े लगाए गए हैं। सोलर लाइट की व्यवस्था भी नहीं की गई है और सबसे बुनियादी सुविधा पानी की टंकी तक स्थापित नहीं है। इन महत्वपूर्ण सुविधाओं के बिना भवन का हैंडओवर कर दिया जाना उन्हें सरकारी कार्यशैली पर सवाल उठाने को मजबूर कर रहा है। ग्रामीणों ने इसे स्पष्ट लापरवाही बताया और कहा कि इस तरह अधूरा ढांचा खड़ा कर देने से समुदाय को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
यह मुद्दा तब और उभरकर सामने आया जब स्थानीय सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता दीपक रंजीत ने मामले को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पूर्वी सिंहभूम के डीसी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए लिखा कि ठेकेदार ने अधूरा भवन बनाकर हैंडओवर कर दिया है, जबकि ग्रामीण लंबे समय से कार्य पूरा होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके ट्वीट के साथ साझा की गई अख़बारी कटिंग में भी ग्रामीणों की शिकायतें विस्तार से दर्ज थीं।
शिकायत सामने आने के तुरंत बाद डीसी ईस्ट सिंहभूम ने प्रतिक्रिया दी और स्पष्ट किया कि परियोजना निदेशक आईटीडीए को पूरे मामले की जांच कर विधि सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दे दिया गया है। प्रशासनिक स्तर से आए इस त्वरित आदेश के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि जांच के बाद तथ्य सामने आएंगे और अधूरे काम को पूरा कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन सही तरीके से पूर्ण हो जाता, तो यह गांव के विकास और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता था। मगर अधूरे निर्माण के कारण फिलहाल यह संरचना उपयोग से बाहर पड़ी है। अब सभी की निगाहें आईटीडीए की जांच रिपोर्ट पर टिक गई हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि अधूरा कार्य क्यों छोड़ा गया और आगे कब तक इसे पूरा कराया जाएगा। प्रशासनिक हस्तक्षेप के पश्चात ग्रामीणों में यह भरोसा पैदा हुआ है कि भवन का शेष कार्य शीघ्र पूरा होगा और यह योजना अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति कर सकेगी।





