उत्क्रमित उच्च विद्यालय बनने के 14 वर्षों बाद भी गोबरघुसी को भवन नसीब नहीं, अब प्लस टू बनाने की चल रही तैयारी

Patamda: मध्य विद्यालय से उत्क्रमित उच्च विद्यालय बने 14 वर्ष बीत गए लेकिन उसके नाम पर आज तक एक भी भवन नसीब नहीं हुई, अब फिर से उत्क्रमित इस विद्यालय को प्लस टू का दर्जा देने की तैयारी चल रही है। अब शिक्षकों को इस बात की चिंता सताने लगी है कि प्लस टू के बच्चों को कहां और कैसे बैठाई जाएगी। यह मामला है पटमदा प्रखंड अंतर्गत गोबरघुसी उत्क्रमित उच्च विद्यालय का।

वर्ष 2011 में इसे मध्य विद्यालय से उच्च विद्यालय का दर्जा हासिल हुआ था तो क्षेत्र के लोग इस बात से खुश थे कि अब उनके बच्चों को माध्यमिक शिक्षा हासिल होगी, जिनके लिए अलग भवन होगा, शिक्षकों की व्यवस्था भी होगी। लेकिन विडंबना देखिए, यहां के सैकड़ों विद्यार्थी जर्जर और पुराने भवनों में बैठकर ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। खासकर बरसात के दिनों में तो स्थिति बदतर हो जाती है। ऐसी बात नहीं है कि इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को नहीं है बल्कि इस ओर किसी ने ध्यान देना शायद उचित नहीं समझा इसलिए समस्याएं जस की तस है।
अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजना नहीं चाहते हैं। उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता हमेशा बनी रहती है। मध्य विद्यालय के भवन में ही माध्यमिक कक्षाओं का संचालन हो रहा है। प्रधानाध्यापक उपेंद्र बेसरा ने कहा कि कमरों के अभाव में कक्षा एक से तीन के 36 विद्यार्थियों को एक कमरे में और चौथी से पांचवीं के 38 विद्यार्थियों को एक अन्य कमरे में संयुक्त रूप से बैठा कर कक्षाएं चलाई जाती हैं। वर्तमान सत्र-2025-26 में कक्षा एक से आठवीं तक के 225 विद्यार्थी जबकि नौवीं व दसवीं कक्षा को में कुल 320 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन समस्याओं के बारे में विद्यालय प्रबंधन समिति की ओर से स्थानीय विधायक मंगल कालिंदी, सांसद विद्युत वरण महतो एवं उपायुक्त तक से भी गुहार लगाई जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। अभी विद्यालय में कुल 545 विद्यार्थी नामांकित हैं।
विद्यालय में भवनों की कमी के साथ-साथ बैंच डेस्क की कमी और चाहरदीवारी एवं विद्यार्थियों के अनुपात में पर्याप्त शौचालय की भी कमी है। 10वीं की छात्रा आयुषी चटर्जी ने बताया कि भारी वर्षा के कारण विद्यालय भवनों के छत से पानी का रिसाव कक्षा के अंदर हो रहा है जिससे बैंच – डेस्क के साथ- साथ बच्चे भी पानी से भींग जाते हैं। 10वीं के छात्र रोहित कुमार ने कहा कि भवनों की जर्जर स्थितियों के कारण हमलोग को पढ़ाई में मन नहीं लगता है, जर्जर भवनों की तरफ ही सभी विद्यार्थियों का ध्यान लगा रहता है सभी विद्यार्थियों के मन में डर लगा रहता है कि कहीं अनहोनी न हो जाए।





