बोंटा में तीन आदिम जनजाति परिवारों को वन विभाग ने पक्का मकान तोड़ने का भेजा नोटिस

15 दिनों की दी गई है मोहलत, मचा हड़कंप
Patamda : दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी वन क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। जबकि अब तक दर्जनों लोगों को नोटिस भी दिया जा चुका है जिन्हें अपने से वन विभाग की जमीन को खाली करने का निर्देश है। अगर उनलोग स्वयं खाली नहीं करते हैं तो वन विभाग का बुलडोजर पक्के मकानों या निर्माण को जमींदोज कर सकता है। लेकिन अब तक हुई कार्रवाई को अगर देखा जाए तो इसमें अधिकतर गरीब लोग ही शामिल हैं।
वहीं बोड़ाम प्रखंड अंतर्गत बोंटा पंचायत के बांदरजलकोचा टोला में आदिम जनजाति समुदाय के तीन पहाड़िया परिवारों के नाम पर भी नोटिस जारी किया गया है जिससे उनलोगों में हड़कंप मचा हुआ है। इस संबंध में स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों तक 14 आदिम जनजाति पहाड़िया परिवार जिनके पास न तो अपना घर था और न ही जमीन थी। किसी तरह बोंटा के बांदरजोलकोचा में जंगल के बीच प्लास्टिक एवं बांस की चटाई को घेर कर अपने परिवार के साथ रहने लगे थे। 2010 में पंचायती राज व्यवस्था आने के बाद मुखिया व प्रखंड प्रशासन की देखरेख में वहां बिजली एवं पानी की व्यवस्था की गई। फिर स्थानीय प्रशासन द्वारा धीरे-धीरे उन्हें बिरसा आवास एवं पीएम जनमन आवास आवंटन कराया गया, जिसका निर्माण कार्य अब भी जारी है। लाभुक कमल पहाड़िया, रवि पहाड़िया व मधुसूदन पहाड़िया को 2024-25 में आवास मिले हैं।
पहाड़िया परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग पर 2023 में विधायक मंगल कालिंदी भी विधानसभा में आवाज उठा चुके हैं। इसके बाद स्थानीय प्रखंड प्रशासन की देखरेख में वहां आदिम जनजाति परिवारों को आवास आवंटन कराया गया। जिसमें से कमल पहाड़िया, रवि पहाड़िया व मधुसूदन पहाड़िया के घर की छत भी लगभग तैयार हो चुकी है। इसके साथ ही वन विभाग की ओर से विगत 2 जून को पक्के मकान तोड़ने का नोटिस जारी किए जाने से आदिम जनजाति परिवार दहशत में हैं। नोटिस में विभाग द्वारा 15 दिनों की मोहलत दी गई है। यदि पहाड़िया परिवार खुद से पक्के मकान को नहीं तोड़ते तो विभाग द्वारा कार्रवाई की जाएगी।





