गालूडीह नहीं पहुंच पाए बंगाल के आंदोलनकारी अजीत महतो, पुलिस के कब्जे में रहे 12 घंटे

Jamshedpur: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया निवासी सह झारखंड आंदोलनकारी अजीत महतो पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन के निर्देश पर शनिवार को कमलपुर थाना में करीब 12 घंटे तक नजरबंद किए गए थे। उन्हें पुरुलिया से गालूडीह जाने के क्रम में वाहन (स्कॉर्पियो) की तलाशी के क्रम में रोक लिया गया और सुबह करीब साढ़े 8 बजे से शाम 8 बजे तक थाने में बैठाकर रखने के बाद देर शाम ससम्मान छोड़ दिया गया।
करीब 70 वर्षीय अजीत महतो पिछले कई सालों से पश्चिम बंगाल के अलावा झारखंड व ओड़िशा में कुड़मी समाज के आंदोलन में अगुआ के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने शुक्रवार को गालूडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत पुतड़ु गांव पहुंचकर स्व तारापदो महतो के परिजनों से मुलाकात कर परिजनों को सांत्वना दी थी। इसके बाद तारापदो हत्याकांड की जांच, साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी समेत विभिन्न मांगों से संबंधित एक ज्ञापन उपायुक्त एवं वरीय आरक्षी अधीक्षक के नाम गालूडीह थाना प्रभारी को सौंपकर 17 जनवरी को पुतड़ु टोल गेट पर एनएच जाम करने की घोषणा की थी। कुड़मी समाज के मूल मानता के रूप में चर्चित अजीत महतो की हुंकार के बाद जिला प्रशासन ने उनको गालूडीह पहुंचने से पूर्व साथियों समेत कमलपुर थाना में डिटेन कर लिया। झारखंड आंदोलनकारी सह आदिवासी कुड़मी समाज केन्द्रीय कमेटी के मूल मानता(मुख्य सलाहकार), जयराम महतो (केन्द्रीय सह सचिव), सृष्टिधर सरकार (केन्द्रीय बुद्धिजीवी), विश्वजीत महतो (युवा अध्यक्ष पुरुलिया, अजीत पुत्र) दिप्तेन्दु महतो, लालटु महतो, भक्ति महतो (ड्राइवर) को भी डिटेन किया गया। जयराम महतो ने बताया कि उन्हें डिटेन किए जाने के बावजूद आंदोलन सफल रहा और प्रशासन को लिखित समझौता करना पड़ा।






