अफवाह की आग में घिरा बिड़रा, उप मुखिया के हस्तक्षेप से 6 मजदूरों की जान बची
Patamda: पटमदा थाना क्षेत्र के बिड़रा गांव में मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे अफवाह ने ऐसा रूप ले लिया कि आधा दर्जन निर्दोष लोगों की जान पर बन आई। गांव में अपरिचित चेहरों को देख कुछ लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझ लिया और देखते ही देखते सैकड़ों महिला-पुरुषों की भीड़ इकट्ठा हो गई। भीड़ ने उन लोगों को घेर लिया और मारपीट पर उतारू हो गई। स्थिति इसलिए और बिगड़ गई क्योंकि वे सभी बाहरी मजदूर थे और उनकी बोली-भाषा अलग थी। संवाद ठीक से नहीं हो पाने के कारण ग्रामीणों का शक गहराता गया। करीब आधे घंटे तक सवाल-जवाब और हंगामे का दौर चलता रहा।
इसी बीच सूचना मिलते ही बिड़रा पंचायत के उप मुखिया गोपाल गोराई मौके पर पहुंचे। उन्होंने भीड़ को शांत कराया और सूझबूझ से सभी छह लोगों जिनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं, उनसे अलग से पूछताछ की। जांच में स्पष्ट हुआ कि वे सभी आगुईडांगरा स्थित बीकेएस ईंट भट्ठे में कार्यरत मजदूर हैं, जो छत्तीसगढ़ से कई माह पहले यहां काम करने आए हैं। मंगलवार को भट्ठे में काम बंद रहने के कारण वे घूमते-घूमते करीब दो किलोमीटर दूर बिड़रा गांव पहुंच गए थे। भाषा की समस्या के कारण वे ग्रामीणों को संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे थे, जिससे भ्रम और गहरा गया। उप मुखिया ने तत्काल ईंट भट्ठे के मुंशी कर्ण महांती को सूचना देकर मौके पर बुलाया और सत्यापन के बाद सभी मजदूरों को उनके सुपुर्द कर दिया। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई। इस दौरान ग्रामीणों को समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के बारे में अफवाह फैलाने या मारपीट करने के बजाय पहले पुलिस को सूचना दें। उप मुखिया ने विशेष रूप से अपील की कि सोशल मीडिया या मौखिक अफवाहों पर भरोसा न करें, क्योंकि इससे निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता तो बिड़रा में एक बड़ी और दुखद घटना घट सकती थी।





