छोटानागपुर की बोड़ाम बाटिया परंपरा का धाधकीडीह गांव में सामूहिक निर्वहन

Patamda: छोटानागपुर क्षेत्र की पारंपरिक एवं प्रकृति आधारित लोक परंपरा बोड़ाम–बाटिया का आयोजन पटमदा प्रखण्ड अंतर्गत महुलबना पंचायत के धादकीडीह गांव में सामूहिक रूप से किया गया। यह परंपरा मकर संक्रांति एवं टुसू पर्व के पश्चात माघ माह के पहले रविवार को निभाई जाती है, जिसका उद्देश्य गांव से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर मनुष्यों और पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना माना जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, बोड़ाम बाटिया के दिन गांव के लोग अपने घरों में वर्षभर उपयोग में आए बांस के पुराने उपकरण, चूल्हे की राख, आधा घिसा झाड़ू (ठुटका झाड़ू) एवं अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को एकत्रित करते हैं। इन वस्तुओं पर जल अर्पित कर पारंपरिक विधि से गांव की अंतिम सीमा के बाहर फेंक दिया जाता है। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से बीते वर्ष की नकारात्मकता गांव से बाहर चली जाती है। इस दौरान ग्राम देवता से गांव के लोगों, पशुधन एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की कामना करते हैं। प्रतीकात्मक रूप से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की परंपरा के तहत जीवित मुर्गी के चूजों को उड़ाकर छोड़ने की भी परंपरा निभाई गई।
बोड़ाम बाटिया के पश्चात गांव में सामूहिक वनभोज का आयोजन किया गया, जिसमें महिला, पुरुष और बच्चे बिना किसी भेदभाव के शामिल हुए। वनभोज के दौरान ग्रामीणों ने नए कृषि वर्ष की सकारात्मक शुरुआत, सामूहिक श्रम, आपसी भाईचारे और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि चंद्रशेखर टुडू ने कहा कि बोड़ाम बाटिया केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आदिवासी – मूलवासी समाज की सामूहिक चेतना और प्रकृति संतुलन की जीवन पद्धति है। ऐसी परंपराएं सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार हैं, जिन्हें संरक्षित और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।




