मंत्री रामदास सोरेन का बयान : आदिवासियों को आपस में लड़ाने की थी साजिश, भाजपा के टेंडर की राजनीति नहीं हुई सफल

Jamshedpur : राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री रामदास सोरेन ने हूल महोत्सव के मौके पर भोगनाडीह में आयोजित कार्यक्रम से लौटने पर मंगलवार को पटमदा में पत्रकारों से विशेष बातचीत की। उन्होंने कहा कि 30 जून को हूल माहा (दिवस) के 170वें वर्ष में भी वही इतिहास याद किया गया, जब 171 वर्ष पहले वीर शहीद सिद्धू-कान्हू को अंग्रेजों ने फांसी पर लटकाया था। उन्होंने कहा कि जिस ऐतिहासिक बरगद पेड़ पर दोनों भाइयों को फांसी दी गई थी, वहां हर वर्ष श्रद्धांजलि सभा होती है। सिदो कान्हु, फूलो झानो चांद भैरव के नाम पर बनी पार्क पर सरकारी कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित किए जाते हैं। पहले हर वर्ष गुरुजी शिबू सोरेन जाते थे और बाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जाने लगे। इस वर्ष गुरुजी के बीमार होने की वजह से मुख्यमंत्री के निर्देश पर वे गए थे। इस बार हूल दिवस पर वहां के आदिवासी मूलवासियों को आपस में लड़ाने की साजिश काफी पहले से विपक्षियों द्वारा रची गई थी। प्री प्लान के तहत केंद्र की सत्तारूढ़ दल भाजपा द्वारा अपने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को टेंडर दिया गया था कि वहां के कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार को बदनाम करो। लेकिन उस प्लान में भाजपा के लोग सफल नहीं हो पाए।

मंत्री ने कहा कि साहेबगंज के एसपी ने जांच के दौरान स्पष्ट कर दिया है कि एक पूर्व मुख्यमंत्री जिसे भाजपा ने मुख्यमंत्री बनाने का लालच दिया था, उनके ही दो लोग सुधीर कुमार और गणेश मंडल हथियार के साथ पकड़ाया। उनके साथ और भी काफी लोग हैं जो जांच के बाद पूरी तरह से खुलासा होगा। मंत्री ने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के कई लोग पिछले कई दिनों से उस इलाके में घूम-घूम कर लोगों के बीच कपड़े और रुपए बांट रहे थे। इस घटना में कुछ वैसे नेता भी थे जिन्हें भाजपा ने मंत्री पद का लालच दिया था। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने धैर्य का परिचय देते हुए मामले को संभाल लिया और विपक्षी लोग अपने मंसूबे में सफल नहीं हो पाए।
मंत्री ने कहा कि अंग्रेज सरकार आदिवासियों से जबरन राजस्व वसूलती थी, जबकि उस क्षेत्र के आदिवासी मूलवासी जंगल झाड़ काटकर गांव बसाए, खेत खलिहान खुद बनाए। इसके बावजूद जबरन टैक्स वसूली के विरोध में सिद्धू-कान्हू ने विद्रोह का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि पहले इस क्षेत्र के दारोगा को भी टैक्स वसूली में आदिवासियों ने सबक सिखाया था। उसी विद्रोह के चलते अंग्रेज पुलिस ने दोनों वीर भाइयों को पकड़कर बरगद पेड़ पर फांसी दे दी थी। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार शहीद पार्क में ताला लगा दिया गया था ताकि कार्यक्रम न हो सके, लेकिन पुलिस और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद पार्क खोला गया। मंत्री के पहुंचने के पूर्व ही वहां माहौल शांत हो चुका था। मंत्री रामदास सोरेन ने स्थानीय सांसद विजय हांसदा एवं विधायकों समेत हजारों की भीड़ के समक्ष पूजा-अर्चना कर सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और उनके परिवारों को सम्मानित किया गया। पटमदा में मंत्री के साथ विधायक प्रतिनिधि चन्द्रशेखर टुडू, झामुमो नेता सुभाष कर्मकार, कालीपद गोराई, वीर सिंह सुरीन, पिंटू दत्ता, राजा सिंह, बाबलू रूहिदास, दीपंकर महतो, जीतूलाल मुर्मू, सिजेन हेंब्रम, स्वपन कुमार महतो, राधेश्याम दास, ग्राम प्रधान बृंदावन दास, शिक्षक जगदीश प्रसाद मंडल, उज्ज्वल कांति दास समेत काफी संख्या में लोग शामिल थे।
इससे पूर्व मंत्री का बेलटांड़ चौक पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान मंत्री रामदास सोरेन से कई लोगों ने अपनी समस्याएं बताई। मंत्री ने कुछ लोगों को आर्थिक सहयोग भी किया। वहीं दूसरी ओर कमलपुर थाना क्षेत्र के काटिन चौक पर शंभू दास एवं मृत्युंजय महतो के नेतृत्व में जगन्नाथ मंदिर कमेटी की ओर से मंत्री का स्वागत किया गया।





