नहीं रहे पटमदा के प्रथम होटल संचालक शक्ति बाबू, शोक की लहर
शक्तिपद दत्त (फाइल फोटो)
Patamda: पटमदा बाजार में पिछले करीब 5 दशक पूर्व माचा गांव से आकर पटमदा प्रखंड का पहला होटल खोलने वाले करीब 90 वर्षीय शक्तिपद दत्त का सोमवार की देर शाम अपने घर में ही निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। चार भाइयों में दूसरे शक्ति बाबू का पैतृक गांव माचा में ही मंगलवार को सुबह अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके अंतिम दर्शन को सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे। वह अपने पीछे पत्नी के अलावा दो पुत्रों दीपक कुमार दत्त एवं जयप्रकाश दत्त व दो बेटियों का भरा पूरा संसार छोड़ चल बसे।
इस संबंध में उनके अनन्य मित्र रहे सेवानिवृत्त स्वास्थ्य कर्मी कपिल देव ने बताया कि जब पटमदा में प्रखंड कार्यालय, थाना, अस्पताल के कर्मचारियों को चाय, नाश्ते से लेकर भोजन के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था उस वक्त अपने घर से करीब 3 किमी दूर पटमदा आकर शक्ति बाबू ने कर्मचारियों के आग्रह पर ही पहला होटल खोला था। उस समय पटमदा बाजार नहीं बल्कि बस्ती ही हुआ करता था और उनके खानदान से जुड़े अन्य सदस्यों ने भी तत्कालीन प्रखंड प्रमुख स्व शशिभूषण सिंह की मदद से यहां उनके बाद आकर कपड़े की दुकान, किताब दुकान एवं गल्ले की दुकान खोली। कपिल देव पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि शक्ति बाबू बहुत ही सादा, सरल, मिलनसार एवं मृदुभाषी थे, उनके जैसा व्यक्तित्व विरले ही मिलते हैं। उस जमाने में जब खाने का घोर अभाव हुआ करता था और लोगों के पास रोजगार का बहुत ज्यादा अभाव था तो शक्ति बाबू किसी को भी होटल में खाने के बाद पैसे के लिए तंग नहीं करते थे और न ही किसी प्रकार का तगादा। उनकी पहचान संयुक्त पटमदा (अब पटमदा, कमलपुर व बोड़ाम थाना क्षेत्र) के 162 गांवों के लोगों के बीच शक्ति होटल के मालिक के नाम से थी।
उन्होंने सबसे पहले दौड़सिनी मंदिर के बगल में पुराने सरकारी रोड के पास एक खपरैल के मकान में होटल खोला था। करीब 3 दशक तक होटल का संचालन करने के बाद बच्चे बड़े होने पर उन्होंने व्यवसाय से खुद को अलग कर लिया था और अपने घर में रहने लगे थे। आज उनके दोनों पुत्र हार्डवेयर की दुकान एवं बोरवेल के व्यवसाय से जुड़े हैं और उनके आशीर्वाद एवं कड़ी मेहनत, निरंतर प्रयास और लोगों के बीच बने विश्वास से सफलता के मुकाम पर हैं।





