पटमदा में जुटे जिले भर के ग्राम प्रधान, पेसा नियमावली पर चर्चा
Patamda: पटमदा प्रखंड मुख्यालय स्थित डाक बंगला परिसर में बुधवार को पारंपरिक ग्राम प्रधान संघ पूर्वी सिंहभूम जिला कमेटी की बैठक महासचिव मृत्युंजय महतो की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें सभी प्रखंडों के ग्राम प्रधान शामिल हुए और पेसा नियमावली को लेकर उत्पन्न भ्रम की स्थिति को दूर करने का प्रयास किया गया।
जिला अध्यक्ष अरूण बारिक ने कहा कि पेसा कानून में अनुसूचित क्षेत्र में रह रहे लोगों की अपनी – अपनी परंपरा, रीति-रिवाज, सांस्कृतिक, धार्मिक प्रथाओं को संरक्षित करने के लिए अवसर दिया गया है। अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासी एवं मुलवासियों की अलग अलग-अलग परंपरा है, रीति-रिवाज के अनुसार सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सभी समुदाय के लोग मिलजुल कर स्वशासन व्यवस्था को संचालित करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदि काल से सभी जाति समुदाय
के लोगों का मान्यता प्राप्त व्यक्ति चाहे वह प्रधान हो या किसी अन्य नाम से जाना जाता हो सर्वमान्य है। राज्य सरकार की पंचायती राज अधिनियम 2001 के बनने के बाद अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा को सक्रिय किया गया और 2005 के अधिसूचना के बाद ग्राम प्रधानों को सरकारी मान्यता मिली है जो आज तक कार्यरत हैं। यह हमारी पारंपरिक व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधान बने हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारी मौजूदा ग्राम सभा के अगुवा हैं। इनकी अगुवाई में ग्राम सभा को सशक्तिकरण करने की आवश्यकता है।
अध्यक्षता करते हुए महासचिव मृत्युंजय महतो ने कहा पेसा कानून में पारंपरिक ग्राम सभा की बात कही गई है। पारंपरिक ग्राम प्रधान ही ग्राम की अगुवाई करेंगे। इसको लेकर कुछ लोग क्षेत्र में भ्रम पैदा कर रहे हैं। इससे भ्रमित नहीं होना है। इस अवसर पर अधिवक्ता सह समाजसेवी सनत महतो ने संगठन को सहयोग करने का आश्वासन दिया। समाजसेवी खुदीराम महतो ने झारखंड पेसा नियमावली को विस्तार से अवगत कराया और संगठित रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम को कोकिल महतो, हिमांशु महतो, हेमंत भकत, बनमाली महतो, भूषण महतो, राजेश्वर महतो आदि ने संबोधित किया। सभा का संचालन ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष बृंदावन दास ने किया।





