रेल टेका आंदोलन : अधिकारियों से वार्ता के बाद शाम 6 बजे हेंसालोंग स्टेशन से हटे आंदोलनकारी

Chandil : आदिवासी कुड़मी समाज का पूर्व निर्धारित “रेल टेका” आंदोलन शनिवार को सरायकेला खरसावां जिला अंतर्गत नीमडीह थाना क्षेत्र के हेंसालोंग स्टेशन में शाम 6 बजे अधिकारियों के साथ वार्ता के बाद समाप्त हो गया। बरकाकाना – टाटा यात्री ट्रेन को सुबह लगभग साढ़े सात बजे आंदोलनकारियों ने रोक दिया था। जिसके बाद लगातार 11 घंटे तक रेलवे स्टेशन जाम रहा। रेल टेका आंदोलन का नेतृत्व आजसू के केंद्रीय महासचिव हरेलाल महतो, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष तरुण महतो, विस्थापित नेता राकेश रंजन महतो, केंद्रीय सचिव गोपेश महतो, अनूप कुमार महतो, झारखंड आंदोलनकारी सुनील कुमार महतो एवं पंचायत समिति सदस्य पद्मलोचन महतो ने सामूहिक रूप से किया। जबकि झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) नेत्री भानुमति महतो ने महिला आंदोलनकारियों का नेतृत्व किया।
रेल पटरियों पर सुबह से हजारों महिला पुरुष बैठे रहे और रेलवे ट्रैक पर पारम्परिक वाद्य यंत्र ढोल, नगाड़ा आदि बाजा एवं लोकगीत की धुन में नृत्य करते रहे। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक सरकार हमारी मांगें पूरी नहीं करती है तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन में महिलाओं की काफी भीड़ रही। हरेलाल महतो ने कहा कि अपनी मांगों को रखने के लिए आंदोलन करना हमारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। कुड़मी जाति झारखंड का प्राचीन आदिवासी समुदाय है। हम कुड़मी पहले आदिवासी थे। 1950 में तत्कालीन भारत सरकार ने कुड़मी जाति को आदिवासी सूची से बाहर कर दिया। तरुण महतो ने कहा कि हम अपने हक अधिकार के लिए आंदोलन कर रहे हैं। विस्थापित नेता राकेश रंजन महतो ने कहा कि कुड़मी जनजाति समुदाय है। हम किसी का हकमारी नहीं कर रहे हैं, अपने अधिकार के लिए आंदोलन कर रहे हैं। जेएलकेएम नेत्री भानुमति महतो ने कहा कि कुड़मी जाति को जनजाति में दर्ज करने एवं कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए रेल टेका आंदोलन किया जा रहा है। पदाधिकारियों के साथ वार्ता के बाद शाम छह बजे आंदोलन समाप्त किया गया।





