बोड़ाम के गुरुचरण बने प्रेरणास्रोत, ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर एक साल में कमाया 5 लाख

Patamda : पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम प्रखंड अंतर्गत पोखरिया पंचायत के बड़ाचिड़का निवासी युवा किसान गुरुचरण महतो ने खेती में मिली सफलता से एक अलग पहचान बना ली है। करीब एक दशक से धान व सब्जियों की खेती करते हुए अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले गुरुचरण को खेती में नुकसान के कारण 4 साल पूर्व काफी निराशा हुई थी और उन्होंने इसका विकल्प तलाशना शुरू कर दिया था। इसी क्रम में डेढ़ साल पूर्व उनकी मुलाकात गागीबुरु निवासी किसान प्रबोध कुमार महतो से हुई। उनकी सलाह पर ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की और पहले ही साल में बड़ी सफलता मिली।
गुरुचरण महतो
गुरुचरण बताते हैं कि एक एकड़ जमीन पर उन्होंने तीन फेज में ग्राफ्टेड बैंगन के कुल 1800 पौधे लगाए। छत्तीसगढ़ से 15 रुपए प्रति पौधे मंगाए और मेहनत शुरू की। पहले फेज में की गई 800 पौधों से 3 लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ जबकि दूसरे फेज में 500 पौधों से डेढ़ लाख और तीसरे फेज में 500 पौधों से अब तक दो दिनों में 12 हजार की बिक्री हो चुकी है जबकि आगे इससे कम से कम 1 लाख की कमाई का अनुमान है। उन्होंने बताया कि बाजार में 40 रुपए से लेकर 100 रुपए तक प्रति किलो कीमत मिल चुकी है। एक बैंगन का वजन आधा किलो तक होता है।
ग्राफ्टेड बैंगन की खूबी के बारे में बताते हैं कि इसमें रोग प्रतिरोधक और उत्पादन क्षमता अधिक होती है इसलिए यह काफी मुनाफा देता है। गुरुचरण सब्जियों में मटर, आलू, मिर्च, शकरकंद, करैला, फूलगोभी, बंदगोभी, बरबटी, भिंडी के अलावा ड्रैगन फ्रूट की भी खेती करते हैं। प्रयोग के तौर पर 1 डिसमिल जमीन पर की गई ड्रैगन फ्रूट की खेती में 3 सालों में अब तक 43 हजार का मुनाफा हुआ और अभी लंबे समय तक उत्पादन होगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ड्रैगन फ्रूट की खेती को बड़े पैमाने पर करने की योजना है जो बाजार में 300 रुपए किलो की दर से बिकता है। 3 भाइयों में बड़ा गुरुचरण बताते हैं कि उनका परिवार संयुक्त है और उनका एक भाई सुरेन्द्र टू व्हीलर मैकेनिक है जबकि छोटा भाई जितेंद्र अन्य काम करते हैं, खेती में पूरे परिवार की मदद उन्हें मिलती है। अपने परिवार के 5 बच्चों को हॉस्टल में रखकर पढ़ाई करवा रहे हैं जिसपर प्रतिमाह 10 से 12 हजार खर्च होता है। नौवीं पास गुरुचरण का मानना है कि कृषि कार्य के लिए भी शिक्षित होना जरूरी है इसलिए बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं। उनके पास कुल 7 एकड़ जमीन है जिसमें 5 एकड़ पर धान जबकि 2 एकड़ पर सब्जियों की खेती करते हैं।
क्या है ग्राफ्टेड की विधि :
पटमदा के चुड़दा गांव निवासी प्रगतिशील किसान सह ग्राफ्टेड पौधा उत्पादक यदुनाथ गोराई बताते हैं कि बैगन, टमाटर, मिर्च व आलू मुख्यतः सोलानसिस ग्रुप कॉर्प में आते हैं। ग्राफ्टिंग के माध्यम से दोनों के गुणों का एक सम्मिलन होता है। एक में उत्पादन क्षमता होती है और दूसरे में रोग प्रतिरोधक क्षमता। इस प्रक्रिया में खेती करने से किसानों को पौधों की कीमत अधिक लगती है लेकिन नुकसान का खतरा कम हो जाता है जो वर्तमान समय के हिसाब अधिक जरूरी है। दो अलग-अलग प्रजाति के पौधों का ग्राफ्टिंग (कलम) में रोग सहनशील क्षमता एवं उत्पादन की गुणवत्ता अधिक होती है।





