एक पुल जिसने बदल दी इलाके की तस्वीर और लोगों की तकदीर, अंदर पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट….

2001 में प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने की थी मुख्यमंत्री सेतु योजना की शुरुआत
बाबूलाल मरांडी
Jamshedpur (Special Report) : 15 नवंबर 2000 को अलग झारखंड राज्य का गठन होने के बाद झारखंड में पहले मुख्यमंत्री के रूप में वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शपथ ली थी। एनडीए की सरकार बनते ही उन्होंने राज्य के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं का तोहफा जनता को दिया। उन्हीं योजनाओं में से एक थी मुख्यमंत्री सेतु योजना। उनकी दूरदर्शी और सकारात्मक सोच की वजह से राज्य की करोड़ों ग्रामीण जनता को मुख्यालय से जुड़ने का मौका मिला। जिसके बाद तेजी से उन पिछड़े इलाकों का विकास हुआ जहां एक पुलिया के अभाव में गांव के लोग बरसात के दिनों में अपने घरों या गांव में कैद हो जाते थे। उनका मानना है अगर किसी इलाके में नदी या नालों के ऊपर पुलिया का निर्माण कार्य होता है तो लोग अपने गंतव्यों तक किसी तरह से पहुंच सकेंगे अगर बेहतर सड़क न हो तब भी। क्योंकि सरकारी योजनाओं से वंचित ग्रामीण अपने स्तर से चलने लायक सड़क का निर्माण श्रमदान करके भी कर सकते हैं लेकिन पुलिया का निर्माण उनके लिए मुश्किल काम होता है। राज्य बनने के बाद प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अब तक सैकड़ों की संख्या में मुख्यमंत्री सेतु योजना के तहत पुलिया का निर्माण हुआ जिसके कारण नदी या नालों के आसपास रहने वाले लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। इसी कड़ी में करीब 15 साल पूर्व स्वर्णरेखा नदी में जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत कुस्तुलिया और बड़ाबांकी में 2 पुलिया की स्वीकृति मिली थी जिससे इस क्षेत्र की तस्वीर ही बदल गई है।
2010 में पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस ने कुस्तुलिया में रखी थी मुख्यमंत्री सेतु की आधारशिला
रामचंद्र सहिस
जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जमशेदपुर प्रखंड के लुआबासा निवासी रंजीत महतो का कहना है कि यहां के लोगों ने सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि इस क्षेत्र में कभी साढ़े 5 मीटर चौड़ी सड़क बनेगी। लेकिन 2010 में तत्कालीन जुगसलाई विधायक रामचंद्र सहिस द्वारा मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना से इसकी स्वीकृति दिलाने के बाद चांदनी चौक एनएच 33 से करीब डेढ़ किमी दूर कुस्तुलिया में पुलिया की आधारशिला रखी गई। 2012- 13 तक पुलिया का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह बेकार पड़ा हुआ था और ग्रामीण पथ विभाग की ओर से इसका सर्वे किया जा रहा था। पहले तो वन क्षेत्र से होकर सड़क का निर्माण किया जाना था लेकिन उसमें एनओसी का लंबा चक्कर होने की संभावना को देखते हुए झारखंड सरकार की अनाबाद खास जमीन एवं लुआबासा, कुस्तुलिया, घोड़ाबांधा के ग्रामीणों की कुछ रैयती जमीन पर सड़क निर्माण हेतु सर्वे कार्य पूरा हुआ और 2018 से भूमि अधिग्रहण का कार्य शुरू किया गया। बाद में इसे पथ निर्माण विभाग ने ले लिया और निर्माण कार्य की स्वीकृति रामचंद्र सहिस के कार्यकाल में ही मिली। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पूर्व इस गांव में कोई सड़क ही नहीं थी और घूम-घूम कर यहां के लोग जमशेदपुर प्रखंड मुख्यालय या शहर में प्रवेश करते थे। स्थिति ऐसी थी कि बाहर के लोग रिश्ता जोड़ने से भी कतराते थे लेकिन अब तो यह जमशेदपुर से सट गया है। उन्होंने कहा कि एक पुलिया ने इस इलाके की तस्वीर और लोगों की तकदीर को बदलने का काम किया है।
बादल महतो
लुआबासा निवासी 82 वर्षीय सेवानिवृत्त टाटा स्टील कर्मी बादल महतो ने बताया कि 10 साल पूर्व तक वह हीराचूनी स्थित मामा घर जाने के लिए नाव का सहारा लेते थे और उसमें काफी दिक्कतें होती थीं लेकिन अब तो जिंदगी आसान हो गई।
प्रदीप कुमार महतो
हीराचुनी निवासी 63 वर्षीय सेवानिवृत्त पंचायत सचिव प्रदीप कुमार महतो ने बताया कि इस पुलिया के निर्माण के बाद से लोगों में विकास की उम्मीद जगी और आज इस क्षेत्र के छात्र-छात्राएं आसानी से उच्च शिक्षा का लाभ उठा रहे हैं और परिवार के लोगों की आमदनी का स्रोत भी बढ़ गया है।
भू-अर्जन विभाग मुआवजे का मामला सुलझा ले तो आसान होगी सफर


जमशेदपुर शहर को गांव एवं एनएच 33 से जोड़ने वाली सड़क गोविंदपुर अन्ना चौक से एनएच 33 चांदनी चौक करीब 10 किमी सड़क का निर्माण कार्य प्रशासनिक लापरवाही एवं अन्य कारणों से 7 सालों के बाद भी अधूरी पड़ी हुई है। करीब 200 मीटर सड़क का निर्माण कार्य नहीं होने के कारण आसपास के करीब 20 गांवों के लोग करोड़ों की योजना का संपूर्ण लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। यह स्थान है जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत गोविंदपुर थाना क्षेत्र के लुआबासा गांव में पंचायत मंडप के पास का। यहां भू-अर्जन विभाग, जमशेदपुर की ओर से पथ निर्माण विभाग अंतर्गत सड़क निर्माण कार्य हेतु लुआबासा गांव में ही करीब 3 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। उसके बाद से यहां के दर्जनों रैयतों को जमीन के बदले मुआवजा दिया जा चुका है इसलिए करीब 7 सालों के दौरान कुस्तुलिया एवं लुआबासा में स्वर्णरेखा नदी को जोड़ने वाली पुलिया की पहुंच पथ समेत अधिकांश रैयती जमीन पर सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इस सड़क में खासकर दुपहिया वाहन चालकों का आवागमन 2020 से शुरू हुआ और चार पहिया वाहनों के अलावा ट्रकों का भी आवागमन 2024 से शुरू हो चुका है। लेकिन अधूरी सड़क में इस बरसात के मौसम में आवागमन जोखिम भरा है। लुआबासा मौजा की कुल 3 एकड़ जमीन का अधिग्रहण के पश्चात् सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो तालाब के पास एवं सागवान बागान के पास रैयतों ने काम रोक दिया, इसका कारण है मुआवजा का मामला लंबित रखना। जबकि अन्य गांवों में जहां भी रैयती जमीन सड़क निर्माण कार्य हेतु अधिग्रहण की जरूरत पड़ी वहां मुआवजा देकर मामले को सुलझा लिया गया एवं जहा-जहां वन विभाग की जमीन पड़ी, वहां एनओसी लेकर काम को पूरा कर लिया गया। सभी मामले सुलझाकर 99 प्रतिशत से अधिक काम पूरा कर लिया गया है।
संयुक्त तालाब की 120 मीटर जमीन का काम 5 परिवारों ने रोका
लुआबासा में सड़क का निर्माण के लिए एक बस्ती के कई मकानों को बचाना था, इसलिए 48 परिवारों के एक संयुक्त तालाब से होकर रास्ते का सर्वे फाइनल हुआ था। तालाब की 16 डिसमिल जमीन पर 24 लाख मुआवजा की राशि तय हुई थी। इनमें से 43 परिवारों को 17 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया है। सिर्फ 5 परिवारों को अब तक 7 लाख रुपए का भुगतान नहीं किए जाने की वजह से काम आगे बढ़ नहीं पा रहा है। हालांकि इस वर्ष जनवरी माह में ठेकेदार ने मेटेरियल गिराकर पुलिस-प्रशासन की मदद से बलपूर्वक काम कराना चाहा लेकिन रैयतों के भारी विरोध के कारण वे लोग बैरंग लौट गए। रैयतों का तर्क है कि अगर एक बार सड़क का निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया तो उन्हें मुआवजा की राशि फिर कभी नहीं मिल पाएगी। मुआवजा का बकाया जीतु महतो (आश्रित- बैकुण्ठ महतो, शिवचरण महतो एवं साईबु महतो), केशव महतो (हिमांशु महतो, संजय महतो एवं पंचानन महतो), महेश्वर महतो (जमुना महतो, सतीश महतो, शिवचरण महतो एवं रामचरण महतो), द्वारिका नाथ महतो (रतन महतो, अजीत महतो एवं राजेश महतो) व फकीर चंद्र महतो (रंजीत महतो एवं पातुराम महतो) के नाम शामिल हैं। बताते हैं कि भू-अर्जन विभाग की ओर से जिन 5 लोगों के नाम नोटिस जारी किए गए थे, उनकी मौत हो चुकी है और उनके आश्रितों को अलग-अलग भुगतान वंशावली बनाकर जमा करने के बाद ही हो सकती है। सभी 5 परिवारों के आश्रितों द्वारा वंशावली जमा किए जाने के बावजूद भू-अर्जन विभाग की उदीसनता के कारण मामले को फंसाकर रखा गया है। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही एवं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण ही उन्हें मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हो सका है। इसके अलावा ग्राम प्रधान मजेन महतो की 21 डिसमिल जमीन का मामला भी फंसा हुआ है, जो तालाब के दूसरे छोर पर है। इसमें ग्राम प्रधान को तय राशि 27 लाख में से 9 लाख का भुगतान हो चुका है, शेष राशि 18 लाख का मामला ग्राम प्रधान की दो बहनों की आपत्ति के बाद आपसी विवाद में फंसा हुआ है। इस संबंध में ग्राम प्रधान मजेन महतो का कहना है कि 2023 में न्यायालय से उन्हें डिग्री मिल चुकी है और न्यायाधीश द्वारा उन्हें भुगतान करने का आदेश भी हुआ है। उसकी काॅपी भू-अर्जन विभाग को दिए जाने के बावजूद विभागीय पदाधिकारी भुगतान नहीं कर रहे हैं।
एक परिवार ने रोका 80 मीटर सड़क का काम
लुआबासा में तालाब और पुलिया के बीच सागवान बगान की करीब 80 मीटर सड़क में 1 बीघा से अधिक बंदोबस्ती की जमीन (रैयत किरण महतो) का अधिग्रहण किया जा चुका है। एक ही परिवार के दो भाइयों शरत महतो एवं हेमंत महतो ने रोका है। उनकी जमीन की मुआवजा राशि करीब 60 लाख रुपए है। इस जमीन के लिए किरण महतो के नाम नोटिस जारी हुई थी लेकिन किरण महतो की मौत के बाद परिवार में आपसी विवाद के कारण मामला फंस गया है। ग्रामीणों का कहना है कि किरण महतो के दो बेटों ने वंशावली बनाकर कार्यालय में जमा कर दिया है लेकिन इसमें उनकी दो बेटियों ने भी दावा ठोक दिया है और उसका मामला अभी फाइनल नहीं होने के कारण भुगतान रूक गया है। इस स्थान पर पिछले करीब एक माह पूर्व पेड़ काटकर गिरा देने एवं रास्ता को पूरी तरह से बंद कर देने पर राज्य के शिक्षा मंत्री सह घाटशिला विधायक रामदास सोरेन के हस्तक्षेप के बाद स्थानीय प्रशासन ने खोलवा दिया है। इसमें ठेकेदार ने जमीन को समतल करने के पश्चात् गिट्टी डालकर चलने लायक बना दिया है। ग्रामीणों के अनुसार इसमें मौखिक समझौता हुआ है कि जब तक मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होता है तब तक कालीकरण कार्य नहीं होगा।
सड़क से प्रभावित गांव, जिन्हें पहुंच वाला है सीधा फायदा
गोविंदपुर अन्ना चौक से एनएच 33 चांदनी चौक सड़क के निर्माण कार्य पूरा होने से नारगा, बेलाजुड़ी, भागाबांध, पीपला, दलदली, बेको, कुदलुंग, चिरूगोड़ा, बेलाजुड़ी, मदनाबेड़ा, धनिया, हीराचुनी, कमलाबेड़ा, गुरमा, मालियांता, धानचटानी, केसीकुदर, खैरबनी, खोंचाबाजार एवं सालबनी आदि गांव के लोगों को गोविंदपुर, करणडीह प्रखंड कार्यालय, घोड़ाबांधा एवं टाटा मोटर्स आने-जाने में काफी सुविधा होगी। शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को भी अपने विधानसभा क्षेत्र आने-जाने में सुविधा होती है। सबसे बड़ी बात है कि इस रास्ते में कभी-भी कोई जाम की समस्या नहीं होने वाली है, क्योंकि यह पूरी तरह से गांव के बाहर से बनाई गई है। दूसरी ओर जाम की समस्या से परेशान रहने वाले जमशेदपुर शहर के लोगों को भी अगर समय की बचत के साथ घाटशिला, बहरागोड़ा या पश्चिम बंगाल के लिए जाना पड़े तो कम समय में एनएच 33 निकल सकते हैं। टाटा मोटर्स, टेल्को एवं अन्य कंपनियों से निकलने वाले वाहनों का बोझ शहर में नहीं पड़ेगा एवं बाहर-बाहर ही एनएच 33 से जुड़ जाएगा।
भू-अर्जन विभाग आज भुगतान कर दे तो कल से निर्माण कार्य होगा शुरू: ग्राम प्रधान
मजेन महतो
इस संबंध में लुआबासा के ग्राम प्रधान मजेन महतो का कहना है कि अगर जिला प्रशासन मामले को संज्ञान में लेते हुए मुआवजा के मामले को सुलझा लेते हैं और आज भुगतान होता है तो कल से निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, जिसके बाद सभी लोग आराम से आवागमन कर सकेंगे।
पारिवारिक विवाद के कारण नहीं हो रहा है भुगतान: भू-अर्जन पदाधिकारी
गुंजन सिन्हा
पूर्वी सिंहभूम के जिला भू- अर्जन पदाधिकारी गुंजन सिन्हा ने बताया कि पारिवारिक विवाद की वजह से मुआवजा भुगतान नहीं हो पा रहा है। बंदोबस्ती जमीन थी, जिसका मुआवजा नहीं मिल सकता। बाद में संरचना निर्माण के मुआवजे की बात हुई। इसमें चार हिस्सेदार हैं। बहनों ने पहले एनओसी दे दी, बाद में दावेदारी कर दी। इस मामले में भाइयों को नोटिस किया, परंतु वे आ नहीं रहे, इसलिए मुआवजा भुगतान नहीं हो पा रहा है।





