बांसगड़ चड़क मेला में भोक्ता घूरा बना आकर्षण का केंद्र, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
Patamda: पटमदा प्रखंड के लच्छीपुर पंचायत अंतर्गत बांसगड़ गांव में रोहिन परब के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय शिव चड़क मेला श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक संस्कृति का अद्भुत संगम बन गया। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सोलोआना कमेटी की ओर से मेले का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण शामिल हुए।
मेले के पहले दिन गुरुवार को दोपहर में पाट भोक्ता तथा शाम में जांगाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें गांव के दर्जनों युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मन्नत पूरी होने पर महिलाओं ने दिनभर उपवास रखकर दंडवत प्रणाम करते हुए मंदिर पहुंच पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। रात्रि में आयोजित छऊ नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पश्चिम बंगाल से पहुंचे कलाकारों ने सामाजिक एवं पौराणिक कथाओं को आकर्षक नृत्य शैली में प्रस्तुत कर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। दूसरे दिन शुक्रवार को संथाली पाता नाच एवं पारंपरिक भोक्ता घूरा कार्यक्रम मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। दो भोक्ता खूंटा (गाछ) में कई श्रद्धालुओं ने पीठ में लोहे का हुक लगाकर करीब 40 फीट ऊंचाई पर लकड़ी के सहारे घूमते हुए भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए मेले में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शाम में आयोजित बूगी-बूगी डांस कार्यक्रम ने युवाओं में खास उत्साह भर दिया।
शनिवार को तेल हल्दिया कार्यक्रम के साथ तीन दिवसीय चड़क मेले का समापन होगा। मुखिया कृष्णपद सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र का सबसे पुराना एवं अंतिम चड़क मेला है, जिसके कारण दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं और मेले का आनंद उठाते हैं। मेले को सफल बनाने में मुखिया कृष्णपद सिंह, ग्राम प्रधान जगन्नाथ सिंह, लक्ष्मीकांत दास, दिलीप सिंह, आशीष महतो, दोल गोविंद महतो, ईश्वर सिंह, निमाई भुईयां एवं गुणधर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा।

