लीज रिन्यूअल की पुनः समीक्षा कर रैयतों और विस्थापितों को न्याय दिलाएं जिला प्रशासन: मंच
Jamshedpur: टाटा कंपनी के लीज नवीनीकरण (रिन्यूअल) से जुड़े मामलों में रैयतों, मूल निवासियों और विस्थापितों को अब तक न्याय नहीं मिलने से झारखंड मूलवासी अधिकार मंच एवं टाटा विस्थापित आदिवासी मंच की ओर से हरमोहन महतो और दीपक रंजीत ने रोष व्यक्त किया है। बुधवार को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए दोनों नेताओं ने कहा है कि 21 फरवरी 2025 को रैयतों एवं विस्थापितों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, झारखंड सरकार को विधिवत ज्ञापन सौंपा गया था। इसी ज्ञापन के आलोक में विभाग द्वारा 11 दिसंबर को एक आधिकारिक पत्र उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम के नाम जारी किया गया है, जिसमें इस विषय पर नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
इस दौरान कहा गया कि वर्ष 2005 के लीज नवीनीकरण के समय भी रैयतों के अधिकारों की अनदेखी की गई थी, जिसका दुष्परिणाम आज तक सामने आ रहा है। मांग की गई कि 2005 के लीज नवीनीकरण की पुनः समीक्षा कर रैयतों और विस्थापितों के साथ हुए अन्याय को सुधारा जाए। ज्ञापन में यह गंभीर सवाल भी उठाया गया कि टाटा कंपनी द्वारा बिना लीज और बिना विधिवत अधिग्रहण कई स्थानों पर रैयती भूमि पर कब्ज़ा कर रखा गया है। ऐसी सभी जमीनों को चिन्हित कर मूल रैयतों को वापस किया जाना चाहिए, साथ ही लीज प्रक्रिया में छूटी हुई रैयती जमीन भी संबंधित रैयतों को लौटाई जाए।
इसके साथ ही मंच ने यह भी सवाल उठाया कि जिन जमीनों से जुड़े मामले वर्तमान में न्यायालय में लंबित हैं, उन जमीनों को टाटा कंपनी किस अधिकार और किस प्रक्रिया के तहत लीज अथवा सब-लीज पर दे रही है। यह न्यायिक प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन है। ऐसे सभी मामलों की तत्काल जांच की मांग की गई।
कहा गया कि शहर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद सभी पुराने तालाब, जलस्रोत एवं सामुदायिक संसाधन ग्रामसभा को सौंपे जाएं तथा उन पर किसी भी प्रकार के निजी या कॉर्पोरेट कब्ज़े को समाप्त किया जाए। मंच ने स्पष्ट किया कि पेसा कानून, सीएनटी /एसपीटी अधिनियम के तहत ग्रामसभा की लिखित सहमति के बिना भूमि से जुड़ा कोई भी निर्णय असंवैधानिक है। साथ ही टाटा लीज नवीनीकरण से संबंधित किसी भी समिति या निर्णय प्रक्रिया में विस्थापितों एवं रैयतों को प्रतिनिधित्व दिया जाना अनिवार्य है।
हरमोहन महतो और दीपक रंजीत ने कहा कि जब राज्य सरकार स्वयं इस विषय को संज्ञान में लेकर जिला प्रशासन को कार्रवाई का निर्देश दे चुकी है, तो अब जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह शीघ्र ठोस और पारदर्शी कदम उठाए।
अंत में मंच ने चेतावनी दी कि यदि रैयतों, मूल निवासियों और विस्थापितों को उनका वैधानिक अधिकार नहीं मिला, तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।





