लावजोड़ा गांव में फिर से दिखा जोड़ा लाव
सोमवार को लावजोड़ा गांव में देखी गई लौकी
किसान बिरेन महतो
Patamda: इसे प्रकृति का संयोग कहे या चमत्कार, हाथीखेदा मंदिर के लिए प्रसिद्ध पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम प्रखंड का लावजोड़ा गांव इन दिनों फिर से अपने नाम को लेकर चर्चा में है। दरअसल लावजोड़ा का शाब्दिक अर्थ होता है एक जोड़ी लौकी। स्थानीय भाषा में लौकी को लाव कहा जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक इस गांव में कभी एक साथ एक जोड़ी लौकी की फसल होने की वजह से ही गांव का नाम लावजोड़ा रखा गया था। अपने अतीत को फिर से दोहराते हुए इस बार इसी गांव में बिरेन महतो की बाड़ी में की गई बागवानी में एक जोड़ी लौकी एक साथ देखने को मिली। देखते ही लोगों में चर्चा तेज हो गई है और उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है। इस संबंध में बिरेन महतो ने बताया कि आमतौर पर एक साथ दो लौकी का फलना आमतौर पर नहीं होता है इसलिए लोग इसे एक अजूबा मान रहे है। गांव में हुए लौकी के उत्पादन से यह प्रमाणित होता है कि सदियों पूर्व यहां के लोगों ने इसी तरह की चीज देखकर ही गांव का नाम लावजोड़ा रखा था।





