ठंड और शीतलहर के मद्देनजर झारखंड में सभी स्कूलों को 8 जनवरी तक बंद रखने का आदेश, शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लिए छुट्टी नहीं होने से मायूसी
Ranchi : झारखंड में लगातार बढ़ रही ठंड, शीतलहर और घने कोहरे को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी स्कूलों को 8 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया है। हालांकि सोमवार को सुबह में कहीं- कहीं धूप निकलने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली लेकिन पछुआ हवा के कारण कनकनी ठंड का सामना करना पड़ रहा था। रविवार की देर शाम जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न जिलों में 5 एवं 6 जनवरी को 12 वीं तक की कक्षाएं सभी सरकारी/अल्पसंख्यक/निजी स्कूलों में बंद रखने का आदेश जारी किया गया था। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से सोमवार को जारी आदेश के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी, गैर-सरकारी, सहायता प्राप्त, गैर-सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) और निजी स्कूल 6 से 8 जनवरी तक बंद रहेंगे। यह आदेश प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी विद्यार्थियों पर लागू होगा। इन तीन दिनों के दौरान राज्य के किसी भी स्कूल में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां संचालित नहीं होंगी। हालांकि, सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी स्कूल में उपस्थित रहेंगे और गैर-शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन करेंगे। शिक्षकों में इस आदेश के बाद मायूसी देखी जा रही है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी स्कूल में इस अवधि के दौरान प्री-बोर्ड परीक्षा प्रस्तावित है तो संबंधित सक्षम प्राधिकारी परिस्थितियों को देखते हुए परीक्षा संचालन को लेकर निर्णय ले सकता है। यह निर्णय मौसम विज्ञान केंद्र, रांची की ओर से जारी ताजा पूर्वानुमान के बाद लिया गया है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक झारखंड के कई जिलों में शीतलहर और ‘कोल्ड डे’ की स्थिति बनी रहने की संभावना है। खासकर पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और हजारीबाग जैसे जिलों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरने का अनुमान है। वहीं, उत्तर और पश्चिमी हिस्सों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी दी गई है, जिससे दृश्यता 50 से 200 मीटर तक सिमट सकती है। राजधानी रांची समेत जमशेदपुर, धनबाद, देवघर और पलामू जैसे जिलों में अगले 48 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की मौसमीय परिस्थितियों में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।






























