मकर संक्रांति को लेकर दिन- रात मेहनत कर मिट्टी के बर्तन तैयार करने में जुटे कुम्हार
Patamda : पटमदा एवं बोड़ाम प्रखंड के विभिन्न गांवों में रहने वाले कुम्हार समुदाय के लोग मकर संक्रांति के मद्देनजर परिजनों के साथ दिन – रात मेहनत कर मिट्टी के बर्तन तैयार करने में जुटे हैं ताकि इन सामग्रियों को स्थानीय बाजारों में बेचकर कुछ आमदनी कर सके और मकर पर्व को परिवारों के साथ बढ़िया से मनाया जा सके। पटमदा प्रखंड के जोड़सा, बिरखाम, गोपालपुर, लावा तथा बोड़ाम प्रखंड के सुसनी, कुईयानी, रूपसान आदि गांवों में काफी संख्या में कुम्हार जाति के लोग निवास करते हैं। इसमें अधिकांश परिवारों ने पुश्तैनी धंधा को छोड़ दिया है। जबकि बाकी बचे कुछ ही परिवार इस पेशा को आज भी जीवित रखने का काम कर रहे हैं।
इस संबंध में जोड़सा गांव निवासी अरुण कुंभकार, श्रावण कुंभकार व दोल गोविंद कुंभकार आदि ने बताया कि मिट्टी के तैयार बर्तनों को पटमदा व गोबरघुसी साप्ताहिक हाट के अलावे जमशेदपुर में व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को थोक भाव में बेच देते हैं। जिससे एक मुश्त कुछ रुपये मिल जाता है और परिवार का भरण पोषण उसी पैसे से किया जाता है। कुम्हारों का कहना है कि भले ही आधुनिकता की हवा पुराने रीति रिवाजों को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रही हो, लेकिन मिट्टी के बर्तनों के आगे आज भी हर तरह की चकाचौंध फीकी पड़ जाती है। ग्रामीण इलाकों में दीपावली, विवाह, धार्मिक अनुष्ठान , मकर संक्रांति या टुसू और अन्य पूजन कार्य कुम्हारों के चाक पर बने बर्तनों के बिना आज भी अधूरा माना जाता है। टुसू पर्व में गुड़ पीठा, मांस पीठा व अन्य जरूरी कामों के लिए हाट बाजारों में मिट्टी की बर्तनों की डिमांड है। हालांकि पहले की तुलना में मिट्टी के बर्तनों की मांग घट गई है। इस कारण नई पीढ़ी के युवा वर्ग इस धंधे से दूरी बनाकर अन्य कामों से रोजगार प्राप्त करने में जुटे हैं।





