झारखंड आंदोलनकारियों के लिए बजट में 1 हजार करोड़ का प्रावधान, जल्द मिलेगा सम्मान और हक : भुवनेश्वर महतो
Patamda: रविवार को पटमदा में झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग के सदस्य भुवनेश्वर महतो ने दुर्योधन महतो के आवास पर आंदोलनकारियों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में पटमदा और बोड़ाम प्रखंड के दर्जनों आंदोलनकारी शामिल हुए, जहां वर्षों से लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए भुवनेश्वर महतो ने बताया कि जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पटमदा और बोड़ाम के कई आंदोलनकारी पहले ही चिह्नित किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक केवल कुछ लोगों को ही प्रशस्ति पत्र मिल पाया है। संपुष्ट सूची में नाम होने के बावजूद अधिकांश आंदोलनकारियों को प्रमाण पत्र नहीं मिलने से भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में उपायुक्त कार्यालय से बातचीत हुई है और बहुत जल्द शेष सभी आंदोलनकारियों को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। वर्तमान में पूरे पूर्वी सिंहभूम जिले में करीब 2200 मामलों का निपटारा लंबित है, जिनमें से लगभग 1200 मामले पटमदा और बोड़ाम प्रखंड से जुड़े हैं, जिन पर प्रक्रिया जारी है। भुवनेश्वर महतो ने आंदोलनकारियों के हित में सरकार द्वारा किए गए प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि चिन्हित आंदोलनकारी परिवारों के आश्रितों को राज्य की नौकरियों में 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिलेगा। साथ ही, सभी आंदोलनकारियों को समान पेंशन देने के उद्देश्य से इस वर्ष के बजट में एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में 3500, 5000 और 7000 रुपये की तीन श्रेणियों में पेंशन दी जा रही है, जिसे एक समान करने की दिशा में पहल की जा रही है। इसके अलावा, आंदोलनकारियों को साढ़े चार लाख रुपये तक की स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ भी दिया जाएगा। इसके लिए आवेदन करने पर सरकार द्वारा विचार किया जाएगा। आयोग के कार्यकाल विस्तार को लेकर उन्होंने बताया कि अभी कई महत्वपूर्ण आंदोलनकारियों जैसे गुरुजी शिबू सोरेन, सुप्रियो भट्टाचार्य और स्व. रामदास सोरेन के नाम गृह विभाग में लंबित हैं। इस कारण मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आयोग का कार्यकाल बढ़ाने का आश्वासन दिया है, ताकि सभी लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके।
बैठक में दुर्योधन महतो, मनबोध महतो, रसराज महतो, मलिंद्र सिंह, श्यामापद रजक, सुनील मुर्मू, अमर गोप, अजीत महतो, सुल्तान अंसारी, आनंदमय महतो, बंक बिहारी महतो, मदन टुडू, गोपाल माहली, प्रणव महतो, पेलाराम सिंह, अबोध सहिस, चित्तरंजन महतो और बाबलू दत्त आदि उपस्थित थे।






























