झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति का उल्टा असर: कमलपुर स्कूल में शिक्षा व्यवस्था चरमराई
2 माह पूर्व कमलपुर मध्य विद्यालय में थे 5 शिक्षक, अब बचे हैं सिर्फ 1
Patamda: झारखंड में सहायक आचार्यों की हालिया नियुक्ति से जहां शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने की उम्मीद जगी थी, वहीं पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड के कमलपुर मध्य विद्यालय की स्थिति इसके ठीक उलट नजर आ रही है। यहां कक्षा पहली से आठवीं तक कुल 202 छात्र नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए फिलहाल सिर्फ एक ही शिक्षक शब्बीर हुसैन मौजूद हैं। करीब दो माह पूर्व तक इस विद्यालय में कुल पांच शिक्षक कार्यरत थे। इनमें अश्विनी सोरेन और मनोज कुमार सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि दशरथ महतो एवं जयदेव बोस को सहायक आचार्य के रूप में दूसरे विद्यालयों में नियुक्त कर दिया गया। परिणामस्वरूप विद्यालय लगभग शिक्षक विहीन स्थिति में पहुंच गया है।
सहायक आचार्यों की नियुक्ति के समय अभिभावकों को उम्मीद थी कि उनके विद्यालय में भी शिक्षकों की पदस्थापना होगी, लेकिन एक माह के भीतर दो शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने से स्थिति और भी गंभीर हो गई। एकमात्र शिक्षक के भरोसे 202 बच्चों की पढ़ाई कैसे संचालित हो रही होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष आदित्य गोराई ने बताया कि बच्चों का भविष्य फिलहाल सिर्फ आश्वासनों पर टिका है। बीते दो माह में ग्रामीणों ने स्थानीय सांसद, विधायक, उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को दो-दो बार ज्ञापन सौंपा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बुधवार को विद्यालय परिसर में अभिभावकों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। वहीं मुखिया जामिनी बेसरा ने बताया कि एक शिक्षक के माध्यम से केवल बच्चों की हाजिरी बन पाती है, शेष समय विभागीय रिपोर्टिंग कार्यों में निकल जाता है। इसका असर यह हुआ है कि विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति पहले की तुलना में काफी घट गई है।
अभिभावकों का कहना है कि जब पढ़ाई ही नहीं हो रही तो बच्चों को सिर्फ मध्याह्न भोजन (एमडीएम) के लिए स्कूल भेजने का क्या औचित्य है। इससे बेहतर है कि बच्चे घर पर ही रहें। साथ ही अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं।





