बाहा बोंगा में झूम उठा सालबनी, प्रकृति व संस्कृति संरक्षण का लिया गया संकल्प
Patamda आदिवासी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की मिसाल पेश करते हुए पटमदा प्रखंड के लावा टोला सालबनी स्थित दिशोम जाहेर गाड़ में शनिवार को प्रकृति का पर्व बाहा बोंगा धूमधाम से मनाया गया। माझी पारगना माहाल बारहा दिशोम पटमदा के तत्वावधान में आयोजित इस पारंपरिक उत्सव में बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों की सहभागिता रही। नायके बाबा पूर्ण हेंब्रम एवं सहयोगी छूटुराम सोरेन ने जाहेरस्थान में विधिवत पूजा-अर्चना कर गांव की सुख-समृद्धि की कामना की। मन्नतें पूरी होने पर ग्रामीणों ने परंपरा के अनुसार मुर्गा और बकरे की बलि चढ़ाई तथा प्रसाद (सोड़े) का वितरण किया गया।
पूजा के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हुई, जिसमें बारहा दिशोम, धाड़ दिशोम और मान दिशोम क्षेत्र के बाहा एनेज दल के सैकड़ों महिला-पुरुषों ने देर शाम तक पारंपरिक बाहा नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
मान दिशोम जामिरा, धाड़ दिशोम जादूगोड़ा और बारहा दिशोम गाड़ीग्राम की टीमों ने मनमोहक प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। जिला पार्षद प्रदीप बेसरा ने बताया कि बाहर से आई दोनों टीमों ने केवल बस किराया लेकर कार्यक्रम में भाग लिया। उनका उद्देश्य सिर्फ परंपरा और संस्कृति का संरक्षण है। विधायक प्रतिनिधि चन्द्रशेखर टुडू ने कहा कि 60–70 किलोमीटर दूर से निस्वार्थ भाव से आकर प्रस्तुति देना सराहनीय है। युवाओं को इनसे प्रेरणा लेकर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लेना चाहिए।
इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि चन्द्रशेखर टुडू, जिला पार्षद प्रदीप बेसरा, मुखिया कानूराम बेसरा, पटमदा थाना प्रभारी करमपाल भगत, कमलपुर थाना प्रभारी अशोक कुमार, पारगना कमला कांत मुर्मू, माझी बाबा दीपक मुर्मू, जीतूलाल मुर्मू, सागेन बेसरा, सिजेन हेंब्रम, दिवाकर टुडू सहित आसपास के माझी बाबा और नायके बाबा समेत हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बाहा बोंगा के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाने के लिए एकजुट है और आने वाली पीढ़ियों तक इसे जीवित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।






























