बकाया बिल के कारण विभाग ने काट दी थी बिजली, पड़ोसी के घरों की रोशनी से जिला टॉप-10 में स्थान
Patamda: हम अक्सर महान विद्वान ईश्वरचंद्र विद्यासागर की वह प्रेरणादायक कहानी सुनते आए हैं, जिसमें उन्होंने बिजली के अभाव में रेलवे स्टेशन की रोशनी में पढ़ाई कर इतिहास रचा था। समय बदला है, लेकिन संघर्ष की यह लौ आज भी बुझी नहीं है। इसका जीवंत उदाहरण हैं सांसद आदर्श ग्राम बांगुड़दा के मेधावी छात्र आकाश महतो। आर्थिक अभाव और घर में बिजली की कमी के बावजूद आकाश ने अपने सपनों को कभी अंधेरे में नहीं डूबने दिया। जब घर में रोशनी नहीं थी, तब उन्होंने पड़ोसियों के घरों की रोशनी को अपना सहारा बनाया और उसी में घंटों मेहनत कर पढ़ाई की। उनकी यह लगन और दृढ़ संकल्प रंग लाया, जब उन्होंने कॉमर्स संकाय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिला टॉप टेन सूची में अपनी जगह बनाई।
पटमदा प्रखंड के सांसद आदर्श ग्राम बांगुड़दा निवासी अत्यंत साधारण परिवार से आने वाले आकाश महतो ने 500 में से 430 अंक हासिल कर पूर्वी सिंहभूम जिले में 9वां स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही वे अपने विद्यालय के टॉपर भी बने हैं।
आकाश बताते हैं कि करीब तीन वर्ष पहले बिजली बिल जमा नहीं कर पाने के कारण उनके घर की बिजली काट दी गई थी। आर्थिक तंगी इतनी रही कि अब तक वे बकाया बिल जमा नहीं कर सके और न ही सरकार की मुफ्त बिजली योजना का लाभ मिल पाया। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद आकाश ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। दिन में घर पर पढ़ाई करने के बाद वे रात में दूसरों के घर जाकर रोशनी में पढ़ते थे। उनके पिता रंजीत कुमार महतो एक छोटे किसान हैं, जबकि माता पबिता महतो गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण आकाश फिलहाल बीकॉम की पढ़ाई जारी रखने में खुद को असमर्थ मानते हैं। उनके घर में एक मोबाइल फोन तक नहीं है और बातचीत के लिए भी पड़ोसी की मदद लेते हैं।
भविष्य को लेकर उनके इरादे भी उतने ही मजबूत हैं। आकाश अब भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहते हैं और इसके लिए वे रोजाना दौड़ का अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में 62 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। शुरुआत में अंग्रेजी कमजोर होने के कारण वे आर्ट्स विषय लेना चाहते थे, लेकिन नियमित कक्षाएं नहीं होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने अपना निर्णय बदलकर कॉमर्स विषय चुना। दो वर्ष पहले विद्यालय में कॉमर्स के लिए एकमात्र शिक्षिका की नियुक्ति हुई, जिसके बाद कुल सात विद्यार्थियों ने इस संकाय में नामांकन लिया। शिक्षिका ने इन छात्रों को विशेष रूप से मार्गदर्शन देते हुए ट्यूशन जैसी पढ़ाई कराई, जिसका परिणाम आज सामने है। आकाश ने यह भी बताया कि उनकी माता को मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। इसके बावजूद परिवार ने उनका मनोबल बनाए रखा। आदिवासी प्लस टू उच्च विद्यालय बांगुड़दा के प्रधानाध्यापक सुजीत कुमार सेठ सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने आकाश की इस सफलता पर गर्व जताते हुए उन्हें बधाई दी है। आकाश की यह कहानी न केवल संघर्ष की मिसाल है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सच्ची लगन और मेहनत से किसी भी अंधेरे को रोशनी में बदला जा सकता है।




