बारियादा और जामबनी में श्रद्धा व परंपरा के साथ सरहुल पूजा संपन्न

Patamda: प्रकृति, पर्यावरण और सामुदायिक एकता के प्रतीक पर्व सरहुल को बोड़ाम प्रखंड के बारियादा और जामबनी गांव में पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। शुक्रवार को आयोजित इस पारंपरिक पूजा में ग्रामीणों ने गांव की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और पर्यावरण संरक्षण की कामना की। बारियादा गांव में शालतल और जाहेरथान दोनों पवित्र स्थलों पर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। शालतल में लाया पद्मलोचन महतो, सुधांशु महतो, पशुपति महतो, परेश नाथ महतो, सतीश महतो, दिलीप महतो और आशीष महतो ने पूजा संपन्न कराई, जबकि जाहेरथान में दयाल महतो, दीपक महतो और तारापद महतो सहित कई ग्रामीणों ने सहभागिता निभाई। इस दौरान रघुनाथ महतो, महादेव महतो, गंगाधर महतो, गोपेन महतो, हलधर महतो, सुमंत महतो, अजय महतो, हरिपद महतो, सुदर्शन महतो, सुनंद महतो और विजय कर्मकार समेत पूरे गांव के लोग उपस्थित रहे।
लाया पद्मलोचन महतो ने बताया कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला पारंपरिक पर्व है। इस दिन विशेष रूप से साल वृक्ष की पूजा की जाती है, जो जीवन और हरियाली का प्रतीक माना जाता है।गांव की सोलहआना कमिटी के नेतृत्व में हर घर के सहयोग से बकरी, भेड़ आदि की व्यवस्था की जाती है, जिन्हें जाहेरथान में बलि देकर उसका मांस पूरे गांव में समान रूप से वितरित किया जाता है। इससे सामाजिक एकता और आपसी भाईचारा मजबूत होता है। साथ ही, श्रद्धालु मिट्टी के हाथी-घोड़े अर्पित कर अपनी मन्नतें भी रखते हैं और पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाते हैं।
इसी तरह जामबनी गांव में भी सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया गया। यहां लाया कृष्ण चंद्र महतो के नेतृत्व में भवतारण महतो, निपती महतो, दिवाकर महतो सहित सभी ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना कर अच्छी बारिश, समृद्धि और गांव की खुशहाली की कामना की।




