अभिषेक के बयान से पलटा खेल: जंगल महल में टीएमसी साफ, अमित शाह के वादे से भाजपा की ऐतिहासिक जीत

कुड़मी समाज की नाराजगी तृणमूल को पड़ी भारी, भाजपा ने जीता विश्वास

Jamshedpur: पश्चिम बंगाल के जंगल महल क्षेत्र के पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदनीपुर जिलों की सभी 40 सीटों पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इन सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे कुड़मी समुदाय की निर्णायक भूमिका मानी जा रही है, जिनका रुझान इस बार स्पष्ट रूप से भाजपा के पक्ष में रहा।
आदिवासी कुड़मी समाज से जुड़े पुरुलिया के हुड़ा ब्लॉक युवा अध्यक्ष सीमंत महतो के अनुसार, टीएमसी के खिलाफ माहौल बनने के कई प्रमुख कारण रहे। वर्ष 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में सत्ता में आई टीएमसी को उस समय कुड़मी समाज का एकमुश्त समर्थन मिला था। लेकिन अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग पर राज्य सरकार द्वारा भेजी गई त्रुटिपूर्ण टीआरआई रिपोर्ट के लौटने के बाद समाज में नाराजगी बढ़ने लगी। इसके बाद “रेल टेका” और “डहर छेका” जैसे आंदोलनों के दौरान राज्य सरकार पर आंदोलन दबाने और समाज के लोगों पर मुकदमे दर्ज करने के आरोप लगे, जिससे आक्रोश और गहरा गया। मामला तब और तूल पकड़ गया, जब झाड़ग्राम में समाज के प्रतिनिधियों ने टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। आरोप है कि उन्होंने यह कहते हुए समुदाय को नजरअंदाज कर दिया कि कुड़मी समाज का वोट टीएमसी को नहीं मिलता। इस बयान को समाज में अहंकार के रूप में देखा गया और व्यापक स्तर पर इसका विरोध हुआ।

वहीं दूसरी ओर, देश के गृह मंत्री अमित शाह ने पुरुलिया की चुनावी सभा में कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का वादा किया। इस घोषणा ने कुड़मी समुदाय के बीच भरोसा पैदा किया और इसे उनकी पहचान व अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। जंगल महल की लगभग 40 सीटों पर कुड़मी समुदाय का प्रभाव माना जाता है। खासकर पांच सामान्य सीटों पर उनकी बहुलता के कारण भाजपा ने समाज से जुड़े उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, जिसका सीधा फायदा भी मिला।


**प्रमुख जीत के आंकड़े:**
* जयपुर सीट से कुड़मी आंदोलन के प्रमुख नेता अजीत प्रसाद महतो के बेटे विश्वजीत महतो ने 22,218 मतों से जीत दर्ज की
* बाघमुंडी सीट से रोहिदास महतो ने 40,817 मतों से जीत हासिल की
* बलरामपुर सीट से जलधर महतो ने 35 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की
* गोपीबल्लभपुर से राजेश महतो ने 26,675 मतों से जीत हासिल की
* सालबनी सीट से बिमान महतो ने 15,243 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर टीएमसी प्रत्याशी व मंत्री श्रीकांत महतो को पराजित किया
जंगल महल का यह जनादेश स्पष्ट संकेत देता है कि स्थानीय मुद्दे, समुदाय की पहचान और नेतृत्व का व्यवहार चुनावी परिणामों पर गहरा असर डालते हैं। इस बार कुड़मी समुदाय की एकजुटता और रणनीतिक मतदान ने पूरे क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर बदल दी।
इन सबके बीच एक बड़ा सवाल आज भी जंगलमहल के लोगों के मन में बाकी है, इससे पहले भी कुड़मी समाज के कई नेता तृणमूल में शामिल हुए थे, लेकिन समाज की असली मांगों और अधिकारों की आवाज क्या किसी ने सच में उठाई थी? आज जो नए नेता समाज के वोट से जीतकर सामने आए हैं, क्या वे सच में कुड़मी समाज की पहचान, अधिकार और वर्षों की पीड़ा को विधानसभा और संसद तक पहुंचाएंगे? या फिर समय के साथ यह वादे भी राजनीति की भीड़ में खो जाएंगे? जंगलमहल की जनता ने इस बार सिर्फ नेता नहीं बदले, उन्होंने उम्मीद बदली है। अब नजर इस बात पर है कि नया नेतृत्व उस उम्मीद का सम्मान कितनी ईमानदारी से करता है।




