ऐसी कमाई जो मौत के बाद भी साथ रही -चाय वाले की इंसानियत पर उमड़ा जनसैलाब
Patamda: बोड़ाम प्रखंड के बांकादा मोड़ पर वर्षों से चाय-पकौड़ी की छोटी सी दुकान चलाने वाले करीब 30 वर्षीय शंभू सिंह उर्फ ‘मोटू’ अब इस दुनिया में नहीं रहे। करीब 11 दिन पहले एमजीएम अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। वे टीबी से पीड़ित थे। खास बात यह रही कि उन्होंने कभी नशा नहीं किया, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार चूल्हे के धुएं का लंबे समय तक असर उनकी बीमारी की वजह बना। इलाज के दौरान गागीबुरु निवासी बाबूलाल महतो के नेतृत्व में कई लोगों ने हरसंभव मदद की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। पीछे उनका छोटा सा परिवार—बुजुर्ग माता, पत्नी और दो मासूम बेटियां अब असहाय स्थिति में है। लेकिन ‘मोटू’ की असली पहचान उनकी दुकान नहीं, बल्कि उनका व्यवहार था।
उनके निधन की खबर मिलते ही न सिर्फ गांव, पंचायत और प्रखंड बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल समेत सैकड़ों लोग मदद के लिए आगे आए। सोमवार तक लोगों ने कई क्विंटल चावल, नकदी और जरूरी सामान देकर परिवार को सहारा दिया। यह नजारा बताता है कि उन्होंने जिंदगी में लोगों के दिलों में कितनी गहरी जगह बनाई थी।
क्षेत्र के पूर्व जिला पार्षद स्वपन कुमार महतो ने भावुक होकर कहा, मोटू भाई ने अपने व्यवहार से जो कमाया, वह शायद ही कोई कमा पाए। एक झोपड़ी में दुकान चलाकर उन्होंने लोगों के दिलों में घर बना लिया था। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि परिवार को सरकारी योजनाओं से जोड़कर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। करीब एक महीने के भीतर घटी इस घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। लेकिन साथ ही एक गहरा संदेश भी छोड़ गई—इंसान की असली पहचान उसकी दौलत नहीं, बल्कि उसका व्यवहार होता है।






























