शहद प्रोसेसिंग से जुड़े पहाड़िया परिवारों को प्रोत्साहित करने बोड़ाम पहुंचे उपायुक्त, लोगों ने रखीं समस्याएं

आजीविका कार्यों को मजबूती देने और आदिम जनजाति परिवारों के आय वृद्धि पर जोर, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की ली गई जानकारी

Patamda: पूर्वी सिंहभूम जिले के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने बोड़ाम प्रखंड मुख्यालय स्थित जिला परिषद भवन (डाक बंगला) पहुंचकर पहाड़िया, सबर और खड़िया आदिम जनजातीय समुदायों से संवाद किया। यह संवाद विशेष रूप से वन धन विकास केंद्र के तहत शहद प्रोसेसिंग से जुड़ी महिलाओं व परिवारों की आजीविका एवं विपणन की चुनौतियों पर केंद्रित रहा।
इस दौरान उन्होने आदिम जनजाति परिवारों के सरकारी योजनाओं से आच्छादन आदि की जानकारी ली। मौके पर उपस्थित लोगों ने खतियान में खड़िया अंकित होने की वजह से जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने, जंगल के पत्तों से बनाने वाले पत्तलों को उचित मार्केट नहीं मिलने, सभी को पीवीटीजी के तहत पेंशन नहीं मिलने, ममता वाहन संचालकों द्वारा 500 से 1000 रुपए वसूली करने, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ नहीं मिलने, रोजगार की कमी होने, पेयजल की समस्या, पशुधन विकास योजना के तहत मिली बकरियों के मरने पर बीमा का लाभ नहीं मिलने, आधार कार्ड व जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनने व भवन के अभाव में पेड़ के नीचे आंगनबाड़ी केंद्र चलने आदि समस्याएं रखीं। इसमें खोखरो, शुक्ला, पोखरिया, चिमटी एवं अन्य गांवों से आए आदिम जनजाति समुदाय के लोग शामिल थे। उपायुक्त ने सभी समस्याओं को ध्यान से सुनने के उपरांत उप विकास आयुक्त, बीडीओ व सीओ को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि शहद प्रोसेसिंग का काम कर रही महिलाओं से मिलना और उनकी गतिविधियों को नजदीक से समझना मेरा मुख्य उद्देश्य था। हमें देखना है कि कैसे इन प्रयासों को और बढ़ाया जाए, कैसे इनके उत्पादों के लिए नए और स्थायी बाजार तलाशे जाएं ताकि इनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि बोड़ाम जैसे क्षेत्रों में केवल शहद (बोड़ाम हनी ब्रांड) नहीं, बल्कि अन्य आजीविका आधारित कार्य भी हो रहे हैं। जिला प्रशासन का यह प्रयास है कि इन कार्यों को संस्थागत रूप से गति दी जाए ताकि समुदाय की प्रति व्यक्ति आय में निरंतर वृद्धि हो सके। हम यह भी देख रहे हैं कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अगर कहीं कोई कमी है, तो उसे कैसे दूर किया जाए।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जब कोई नया उत्पाद बनता है तो शुरुआती दौर में सबसे बड़ी चुनौती बाज़ार की होती है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि इन समुदायों द्वारा बनाए गए उत्पादों को अच्छे बाज़ार से जोड़ा जाए और उन्हें व्यापक पहचान दिलाई जाए। इस दिशा में उप विकास आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी और जेएसएलपीएस की टीम मिलकर कार्य कर रही है। उपायुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि आदिम जनजातीय समुदायों की पारंपरिक दक्षताओं और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जाएं और उन्हें संसाधन, प्रशिक्षण एवं विपणन में भरपूर सहयोग दिया जाए। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान, धालभूम एसडीओ शताब्दी मजूमदार, जिला पार्षद गीतांजलि महतो, प्रखंड प्रमुख ललिता सिंह, बीडीओ किकू महतो, सीओ रंजीत रंजन, डीपीएम जेएसएलपीएस सुजीत बारी व अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।





