पटमदा में दशकों पुरानी परंपरा है बत्तख पकड़ने की प्रतियोगिता, सिसदा नदी में उमड़े लोग, सुमित्रा टुडू को मिला पहला पुरस्कार
मकर संक्रांति पर आयोजित बत्तख पकड़ने का जोखिम भरा खेल में उत्साह के साथ शामिल होती हैं महिलाएं
Patamda: पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड अंतर्गत लावा पंचायत के सिसदा गांव स्थित टोटको नाला (छोटी नदी) में मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में बुधवार को टुसू मेला, मुर्गा पाड़ा एवं बत्तख पकड़ने की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शत प्रतिशत आदिवासी बहुल गांव सिसदा का यह मेला वैसे तो करीब सौ वर्ष पुराना है लेकिन पूरे पटमदा एवं बोड़ाम क्षेत्र के लिए एकमात्र इस मेले में बत्तख पकड़ने की प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र बनती है जो पिछले 60 वर्षों से लगातार जारी रही है। यहां दूर-दराज से हजारों की संख्या में पुरुष -महिलाएं जुटते हैं और दोपहर से देर शाम तक मेला का आनंद उठाते हैं।
इस संबंध में कमेटी के सदस्य आह्लाद सिंह ने बताया कि करीब 6 दशक पहले गांव के सुरेन्द्र सिंह (अब दिवंगत) व भास्कर सिंह ने नदी किनारे शिवलिंग के रूप में पत्थलगढ़ी कर पूजा एवं पानी में बत्तख छोड़ने की शुरूआत की थी। इसमें कमेटी की ओर से एक बत्तख को पूजा के बाद छोड़ दी जाती है और उसे पकड़ने वाली महिला को साड़ी समेत अन्य वस्त्र एवं नकद राशि देकर पुरस्कृत किया जाता है। भीषण ठंड के मौसम में पानी में तैरते हुए बतख को पकड़ने में कभी घंटों लग जाता है, ऐसे में उस महिला या लड़की की क्या स्थिति होती होगी, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन महिलाएं काफी उत्साह के साथ इसमें भाग लेती हैं। वर्तमान में लाया सह ग्राम प्रधान दोलगोविंद सिंह एवं कुड़ाम लाया अभिनय सिंह करते हैं। हालांकि मकर संक्रांति को सुबह- सुबह भूला निवासी पुरोहित शांतनु मुखर्जी के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा भोलेनाथ की पूजा की शुरूआत की जाती है और शाम तक लाया द्वारा पूजा की जाती है। इस दौरान पूर्व में की गई मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालुओं द्वारा एक -एक बतख दिया जाता है जो पूजा के बाद नदी में छोड़ी जाती हैं। इस वर्ष 21 श्रद्धालुओं द्वारा बत्तखों की पूजा कराई गई और उसे पकड़ने वाली महिलाओं को नकद राशि एवं बत्तख देकर पुरस्कृत किया गया।
शिवलिंग की स्थापना करने वाले भास्कर सिंह बताते हैं कि पूर्व में जब गांवों में भूखमरी की स्थिति बनती थी एवं पर्व -त्योहार मनाने की क्षमता नहीं होती थी तब बाबा भोलेनाथ से आराधना शुरू की गई ताकि क्षेत्र के हर परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि आए। आज हर परिवार के लोग अपने खेतों में फसल उपजने के बाद खुशी से मकर संक्रांति का पर्व मनाते हैं और टुसू गीत गाते हुए टुसू देवी की भी आराधना करते हैं। बत्तख पकड़ो प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार सुमित्रा टुडू (गाड़ीग्राम) दिया गया। जबकि अन्य विजेताओं में अंजली मुर्मू, राहला मुर्मू व आरती मुर्मू (गाड़ीग्राम), अंजली मार्डी, फाल्गुनी मुर्मू, ललिता हेंब्रम (सालबनी), पूर्णिमा बेसरा, सूरजमणि मुर्मू व सुनिया मुर्मू (बड़डीह), सुशीला सोरेन (महुलडीह) एवं रीता सहिस (गोबरघुसी) आदि शामिल थीं। कुछ महिलाओं ने 2 से 3 बत्तखें पकड़कर खुद को एक सफल तैराकी के रूप में भी प्रस्तुत किया।
मेला को सफल बनाने में गांव के कालाचांद सिंह, आह्लाद सिंह, फूलचांद सिंह व गोपाल सिंह आदि का सराहनीय योगदान रहा।





