बोड़ाम में पशुधन विकास योजना के तहत बांटा गया एक्सपायरी डेट वाला फीड, एक माह में सैकड़ों मुर्गियों की मौत, हुआ पोस्टमार्टम

Patamda: पूर्वी सिंहभूम जिला पशुपालन विभाग की पशुधन विकास योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर बोड़ाम प्रखंड के विभिन्न गांवों के आदिवासी किसानों को वितरित किए गए चूजों की बड़े पैमाने पर मौत का मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि योजना के तहत मिली मुर्गियां एक माह के भीतर लगातार मर रही हैं, जिससे उनकी आय की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने इसकी सूचना स्थानीय पशुपालन चिकित्सक और विभाग के टोल फ्री नंबर 1908 पर भी दी, लेकिन उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली। विभाग की ओर से निजी चिकित्सकों से इलाज कराने की सलाह दी गई।
किसानों की मांग है कि मृत मुर्गियों का पोस्टमार्टम कराकर यह पता लगाया जाए कि आखिर उनकी मौत किस बीमारी या कारण से हो रही है। किसानों ने आरोप लगाया है कि रांची के नामकुम स्थित वैष्णवी इंटरप्राइजेज द्वारा प्रति लाभुक 520 चूजों के साथ दो वर्ष पुराना एक्सपायरी फीड उपलब्ध कराया गया था। उनका दावा है कि इसी फीड के इस्तेमाल के बाद मुर्गियां लगातार मरने लगीं।
मुकरुडीह पंचायत के आनंद माझी, रंदड़े माझी और रसिक माझी तथा रसिकनगर पंचायत के अशोक माझी के पोल्ट्री शेड में अब तक करीब 220 मुर्गियों की मौत हो चुकी है। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। बोड़ाम के प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. कुंदन कुमार ने कहा कि यदि वास्तव में एक्सपायरी फीड की आपूर्ति हुई थी तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को दी जानी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि पोल्ट्री पालन में लगभग 10 प्रतिशत तक चूजों की मृत्यु सामान्य मानी जाती है, इसलिए पूरे मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं किसान आनंद माझी ने बताया कि शिकायत के बाद आपूर्तिकर्ता की ओर से फीड बदलने का आश्वासन दिया गया, लेकिन तब तक पूरा फीड इस्तेमाल हो चुका था। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद शुक्रवार को पशुपालन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और मृत मुर्गियों का पोस्टमार्टम किया।


