स्वास्थ्य संस्थानों को बड़ी ताकत: अब अस्पताल प्रभारी खुद लेंगे फैसले, बनेंगे डीडीओ
Ranchi : राज्य के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को डीडीओ (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) का अधिकार दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि अधिकारों के विकेंद्रीकरण के तहत अब अस्पताल प्रभारी अपने संस्थान की जरूरतों के अनुसार स्वयं निर्णय ले सकेंगे। उन्हें दवाओं, उपकरणों की खरीद, आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था और आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति के लिए सिविल सर्जन की अनुमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
नई व्यवस्था के तहत केंद्र प्रभारी अस्पताल की जरूरत के अनुसार मानवबल की आउटसोर्सिंग कर सकेंगे। इसके लिए आवश्यक राशि सिविल सर्जन द्वारा संबंधित संस्थान को उपलब्ध कराई जाएगी, जिसका उपयोग प्रभारी अपने विवेक से कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रख-रखाव योजना के तहत सरकार हर वर्ष अस्पतालों को अनुदान देती है। सदर अस्पताल को 75 लाख रुपये, अनुमंडल अस्पताल को 50 लाख रुपये, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं रेफरल अस्पताल को 10 लाख रुपये, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 5 लाख रुपये तथा स्वास्थ्य उपकेंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिर को 2 लाख रुपये प्रतिवर्ष दिए जाते हैं। अब इन राशियों का उपयोग संबंधित संस्थान के प्रभारी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कर सकेंगे। इसके अलावा कंटीजेंसी फंड और अबुआ स्वास्थ्य एवं आयुष्मान योजना से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के उपयोग का अधिकार भी केंद्र प्रभारियों को दिया गया है। विभाग का मानना है कि इस निर्णय से अस्पतालों की व्यवस्थाएं अधिक जवाबदेह, प्रभावी और मरीज केंद्रित बनेंगी।




