बोड़ाम में अनुदान पर मिली बकरियों की मौत, किसान आक्रोशित
Patamda : पशुपालन विभाग की योजना के तहत बोड़ाम प्रखंड के बोंटा पंचायत में किसानों को स्वरोजगार के लिए दी गई बकरियां एक माह के भीतर ही मरने लगी हैं। बीते 30 मार्च को 90 प्रतिशत अनुदान पर 10 किसानों को 10-10 बकरियां (2 बकरा व 8 बकरियां) दी गई थीं, लेकिन अब अधिकांश लाभुकों की बकरियां दम तोड़ चुकी हैं। किसानों का आरोप है कि विभाग द्वारा उन्हें कमजोर और बीमार नस्ल की बकरियां उपलब्ध कराई गई थीं, जिसके कारण इतनी जल्दी उनकी मौत हो गई।
योजना के तहत प्रत्येक लाभुक को करीब 4960 रुपये में बकरियां दी गई थीं और साथ ही अधिकारियों ने बीमा (इंश्योरेंस) होने का भरोसा भी दिया था। किसानों को बताया गया था कि यदि बकरियों की बीमारी से मौत होती है, तो संबंधित बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए विभाग को सूचना देने और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य बताया गया था। हालांकि, किसानों का कहना है कि सूचना देने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उन्हें अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। भगवा सोरेन की 4, मुनका हांसदा की 6, लवकिशोर हांसदा की 4 तथा बूधै मांडी और गोपाल माहली की 6-6 बकरियां मर चुकी हैं। इससे किसानों में विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है। वहीं, प्रभारी पशुपालन पदाधिकारी डॉ. कुंदन ने बताया कि मार्च माह में 10 किसानों के बीच 90 प्रतिशत अनुदान पर बकरियों का वितरण किया गया था और सभी बकरियों के कान में पहचान के लिए टैग लगाया गया है। उन्होंने कहा कि बकरियों के पालन-पोषण, बीमारी या मृत्यु की स्थिति में बीमा प्रक्रिया की पूरी जानकारी किसानों को दी गई थी।
डॉ. कुंदन के अनुसार, बकरियों की मौत की आधिकारिक सूचना अब तक विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कान में लगे टैग के साथ आवेदन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा दिया जाएगा।






























