मिर्जाडीह तालाब में मिट्टी भराई पर प्रशासन सख्त, कार्रवाई के संकेत
Patamda: बोड़ाम अंचल क्षेत्र के मिर्जाडीह गांव स्थित एक तालाब में मिट्टी भराई के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए हस्तक्षेप किया है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने जांच कर तत्काल मिट्टी भराई का कार्य रुकवा दिया है तथा भविष्य में दोबारा ऐसा करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। हालांकि इसके शिकायतकर्ता आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर पिछले 12 दिनों से धरने पर बैठे हैं। जानकारी के अनुसार, मिर्जाडीह मौजा थाना संख्या-20 के खाता संख्या-38 अंतर्गत प्लॉट संख्या-694 (रकबा 0.63 एकड़) एवं प्लॉट संख्या-695 (रकबा 2.94 एकड़) में मिट्टी भराई किए जाने की शिकायत झारखंड मानव अधिकार संघ की ओर से उपायुक्त को सौंपी गई थी।
संघ के अध्यक्ष दिनेश कुमार किनू एवं कोल्हान प्रमंडल प्रभारी राधाकृष्ण सिंह मुंडा ने आरोप लगाया था कि तालाब की प्रकृति वाली भूमि को भरकर उसकी मूल संरचना को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अपर उपायुक्त ने 5 जून को बोड़ाम अंचल अधिकारी को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अंचल कार्यालय की ओर से कराई गई जांच में पाया गया कि मिर्जाडीह निवासी बिरसा टुडू द्वारा संबंधित भूमि के एक हिस्से में मिट्टी भराई कराई जा रही थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर अंचल कार्यालय ने नोटिस जारी कर तत्काल प्रभाव से कार्य बंद करने का निर्देश दिया। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मिट्टी भराई का कार्य रोक दिया गया है।
अंचल अधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी, धालभूम को भेजे प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि संबंधित व्यक्ति को अंतिम चेतावनी दी गई है। यदि भविष्य में उक्त भूमि पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य या मिट्टी भराई की जाती है तो उनके विरुद्ध विधिसम्मत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि रैयती खाते की है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में जलस्रोतों और तालाबों के संरक्षण का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। झारखंड मानव अधिकार संघ ने इसे अपनी शिकायत की पुष्टि बताते हुए कहा कि अब उन्हें मामले में आगे भी ठोस कार्रवाई की उम्मीद है। इधर, शुक्रवार को झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के पूर्व प्रत्याशी विनोद स्वांसी भी मिर्जाडीह पहुंचकर धरना कार्यक्रम को समर्थन दिया। स्थानीय ग्रामीणों ने प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम का स्वागत किया है। वहीं प्रशासन का कहना है कि भूमि की प्रकृति और कानूनी स्थिति के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।



