दासूस महासचिव रामकृष्ण महतो की अपील: मुख्यधारा से जुड़ें नक्सली
Patamda: दलमा आंचलिक सुरक्षा समिति के केंद्रीय महासचिव एवं बोड़ाम निवासी रामकृष्ण महतो ने दलमा क्षेत्र में सक्रिय नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर भटके हुए लोग अपने परिवार के साथ सम्मानजनक और बेहतर जीवन की शुरुआत कर सकते हैं। रामकृष्ण महतो ने हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाली नक्सली शकुंतला महतो उर्फ वर्षा उर्फ पुष्पा को बधाई देते हुए कहा कि उसने वर्षों बाद सही निर्णय लिया है। उनके अनुसार, गरीब परिवार से आने वाली वर्षा मात्र 11 वर्ष की उम्र में अपने चाचा अर्जुन महतो के बहकावे में आकर नक्सली संगठन से जुड़ गई थी। इसके बाद उसने करीब 25 वर्ष तक जंगलों और संगठन के बीच जीवन बिताया, जिससे उसका और उसके परिवार का काफी नुकसान हुआ।
उन्होंने वर्षा से जुड़ी एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2004 में दलमा क्षेत्र में भ्रमण के दौरान वर्षा ने कहा था, यह दलदल की तरह है, जहां प्रवेश करने के कई रास्ते हैं, लेकिन बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं। रामकृष्ण महतो के अनुसार, वर्षा संगठन की कई नीतियों से सहमत नहीं थी, लेकिन परिस्थितियों के कारण लंबे समय तक उससे बाहर नहीं निकल सकी। उन्होंने बताया कि वर्षा को उसके चाचा अर्जुन महतो ने घर से निकालकर गिरिडीह निवासी कुख्यात नक्सली अतुल महतो के दस्ते में शामिल कराया था। अर्जुन महतो पर कई गंभीर आरोप रहे और वह करीब एक दशक पूर्व घाटशिला क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।
रामकृष्ण महतो ने कहा कि वर्षा का आत्मसमर्पण उन नक्सलियों के लिए भी एक संदेश है, जो अभी भी जंगलों में सक्रिय हैं। उन्होंने विशेष रूप से रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, मीता, सागर, रवि समेत दलमा क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सलियों से भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने तथा पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज और परिवार के बीच सम्मानजनक जीवन ही स्थायी समाधान है।



