स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित मथुर महतो बने मिसाल
Patamda: स्वच्छ भारत अभियान के तहत देशभर में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई स्थानों पर साफ-सफाई को लेकर अपेक्षित जागरूकता नहीं दिखती। ऐसे माहौल में बिड़रा गांव निवासी मथुर महतो अपने कार्यों से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। पिछले करीब पांच वर्षों से मथुर महतो प्रतिदिन सुबह 5 बजे से 8 बजे तक गांव की गलियों, सड़कों और घरों के आसपास स्वयं झाड़ू लगाकर सफाई करते हैं। उनका उद्देश्य केवल गांव को स्वच्छ रखना नहीं, बल्कि लोगों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता विकसित करना भी है।
मथुर महतो पेशे से ब्रेल लिपि के शिक्षक हैं। वे झालदा स्थित एक संस्था में लगभग 150 दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षा प्रदान कर समाज सेवा का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। शिक्षा के साथ-साथ वे सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों से भी लगातार जुड़े हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने अपनी लगभग दो एकड़ भूमि पर 3,000 से अधिक पौधे लगाकर हरित वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके इस प्रयास से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि समाज को भी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश मिला है। मथुर महतो का समर्पण यह दर्शाता है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि सेवा भावना, प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। उनके कार्य क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं और स्वच्छ एवं हरित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।



