पटमदा में खराब एंबुलेंस सेवा के कारण मरीज की मौत पर जागी सरकार, 108 संचालक समेत 3 के खिलाफ एफआईआर
साढ़े 6 घंटे तक पटमदा सीएचसी में रहे जिले के सिविल सर्जन
Jamshedpur: पटमदा के जोड़सा गांव निवासी 65 वर्षीय संतोष कुंभकार की समय पर इलाज नहीं मिलने से हुई मौत का मामला तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार की घटना को लेकर प्रकाशित खबर के बाद रांची स्थित स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल को जांच के निर्देश दिए। निर्देश मिलते ही सिविल सर्जन रविवार दोपहर करीब 2 बजे जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ पटमदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचे। उन्होंने करीब साढ़े छह घंटे तक अस्पताल में रहकर एंबुलेंस सेवा, स्वास्थ्य व्यवस्था और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की। रात करीब साढ़े 8 बजे तक चली समीक्षा के दौरान उन्होंने सीएचसी प्रभारी डॉ. राजीव कुमार सिंह से पूरे मामले की जानकारी ली और लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई।
जांच के दौरान सिविल सर्जन ने सवाल उठाया कि रांची से मरम्मत कर लौटने के बाद एंबुलेंस की तकनीकी स्थिति, ऑक्सीजन की उपलब्धता और अन्य आवश्यक उपकरणों की जांच क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन बिंदुओं की जांच होती तो संभवतः ऐसी दुखद घटना टाली जा सकती थी। सिविल सर्जन के निर्देश पर देर शाम पटमदा सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने 108 एंबुलेंस सेवा के संचालक सह पूर्वी सिंहभूम के क्लस्टर लीडर आलोक कुमार, एंबुलेंस चालक निलेश कुमार और तकनीशियन सुजीत कुमार के खिलाफ पटमदा थाना में लापरवाही का आवेदन दिया। आवेदन के आधार पर देर रात तीनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, एंबुलेंस सेवा में बरती गई लापरवाही को मरीज संतोष कुंभकार की मौत का प्रमुख कारण माना जा रहा है। मामले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। वहीं, रविवार को ही संबंधित एंबुलेंस की दोबारा मरम्मत कराकर उसे दुरुस्त किए जाने की भी जानकारी मिली है।


