पुण्यतिथि पर नमन : जिनकी दूरदृष्टि ने बदली ग्रामीण शिक्षा की तस्वीर
Patamda : झारखंड के सुदूर ग्रामीण और जनजातीय बहुल क्षेत्र पटमदा में शिक्षा की अलख जगाने वाले स्वर्गीय प्रफुल्ल कुमार महतो आज भी क्षेत्रवासियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। वे केवल एक कुशल शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि अधिवक्ता, समाजसेवी, झारखंड के पूर्व सूचना आयुक्त तथा पटमदा इंटर कॉलेज और पटमदा डिग्री कॉलेज, जाल्ला के संस्थापक प्राचार्य के रूप में अपनी अमिट पहचान छोड़ गए। ऐसे दौर में, जब पटमदा और बोड़ाम जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, प्रफुल्ल महतो ने शिक्षा को गांव के दरवाजे तक पहुंचाने का सपना देखा। उनके प्रयासों ने न केवल इस पिछड़े क्षेत्र में उच्च शिक्षा की नींव रखी, बल्कि गरीब, आदिवासी, पिछड़े और ग्रामीण परिवारों के बच्चों, खासकर छात्राओं के लिए शिक्षा के नए द्वार खोल दिए।
1984 में रखी उच्च शिक्षा की मजबूत नींव
पिछली सदी के अंतिम दशकों में पटमदा क्षेत्र में उच्च शिक्षा की स्थिति बेहद दयनीय थी। इंटर और स्नातक की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को करीब 30 किलोमीटर दूर जमशेदपुर जाना पड़ता था। आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों के लिए यह आसान नहीं था। ऐसे समय में प्रफुल्ल कुमार महतो ने स्थानीय प्रबुद्ध लोगों और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमूल्य रतन षड़ंगी के सहयोग से 22 सितंबर 1984 में पटमदा कॉलेज, जाल्ला की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसमें इंटर की पढ़ाई शुरू हुई। इसके बाद वर्ष 1993 में पटमदा डिग्री कॉलेज की स्थापना कर उन्होंने ग्रामीण युवाओं के लिए स्नातक स्तर की शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। वे डिग्री कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य बने और सीमित संसाधनों के बावजूद संस्थान को खड़ा करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
गांव-गांव जाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ा
प्रफुल्ल महतो का मानना था कि शिक्षा केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने गांव-गांव जाकर गरीब, आदिवासी, पिछड़े और वंचित परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया। उनकी विशेष चिंता छात्राओं की शिक्षा को लेकर थी। उनके प्रयासों से पटमदा क्षेत्र की अनेक बेटियों को घर के नजदीक ही उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिला। उनकी दूरदृष्टि और अथक प्रयासों का परिणाम रहा कि कॉलेज ने आगे चलकर रांची विश्वविद्यालय और उसके बाद कोल्हान विश्वविद्यालय से संबद्धता हासिल की। इस संस्थान ने क्षेत्र की कई पीढ़ियों को शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पटमदा से राज्य के महत्वपूर्ण संवैधानिक पद तक
प्रफुल्ल कुमार महतो की पहचान केवल शिक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। उनकी प्रशासनिक क्षमता, ईमानदारी और बौद्धिक प्रतिभा के कारण उन्हें झारखंड सरकार में सूचना आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी मिली। पटमदा जैसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर राज्य के महत्वपूर्ण संवैधानिक पद तक पहुंचना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय रहा। महत्वपूर्ण पद पर रहने के बावजूद उनका अपने क्षेत्र और शिक्षा संस्थानों से जुड़ाव हमेशा बना रहा। वे पटमदा के शैक्षणिक और सामाजिक विकास को लेकर लगातार चिंतित और सक्रिय रहे।
बोड़ाम के कुईयानी गांव से जुड़ी थी उनकी जड़ें
स्वर्गीय प्रफुल्ल कुमार महतो का पैतृक निवास पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम प्रखंड अंतर्गत कुईयानी गांव में था। शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय होने से पहले वे पेशे से प्रतिष्ठित अधिवक्ता भी रहे। अपने अनुभव, दूरदृष्टि और सामाजिक सरोकारों को उन्होंने बाद में शिक्षा के विस्तार के लिए समर्पित कर दिया।
पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर से जीवंत रखी जा रही विरासत
उनके निधन के बाद भी उनके विचार और सेवा की भावना को जीवंत रखने का प्रयास जारी है। प्रत्येक वर्ष उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर 2 सितंबर को पटमदा डिग्री कॉलेज में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। कॉलेज की एनएसएस इकाई और उन्नत भारत अभियान से जुड़े कार्यक्रमों में विद्यार्थी, शिक्षक और स्थानीय ग्रामीण बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। उनके शिक्षा और क्षेत्रीय विकास में अतुलनीय योगदान को सम्मान देने के लिए जुगसलाई के विधायक मंगल कालिंदी की ओर से कॉलेज परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित करने की पहल भी की गई है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन और संघर्ष से प्रेरणा ले सकें।
एक व्यक्ति, जिसने बदल दी पूरे क्षेत्र की दिशा
स्वर्गीय प्रफुल्ल कुमार महतो का जीवन इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इच्छाशक्ति और दूरदृष्टि रखने वाला एक व्यक्ति भी पूरे समाज की दिशा बदल सकता है। उन्होंने ऐसे समय में पटमदा में शिक्षा की नींव मजबूत की, जब संसाधन सीमित थे और चुनौतियां अनेक। आज पटमदा और आसपास के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के जो अवसर उपलब्ध हैं, उनकी आधारशिला रखने वालों में प्रफुल्ल कुमार महतो का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनके शिक्षा, सेवा और समाज सुधार के अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना भी है। प्रफुल्ल महतो की विरासत आज भी पटमदा की हर उस बेटी और बेटे की सफलता में जीवित है, जिसे उन्होंने शिक्षा के उजाले तक पहुंचने का रास्ता दिखाया।मूर्ति के साथ एक शिलालेख भी लगाए जाने की जरूरत है जिसमें उनका संक्षिप्त जीवन परिचय अंकित हो। इससे आने वाली पीढ़ियां तथा बाहर से आने वाले पर्यटक इस शिलालेख को देखकर और पढ़कर इस ऐतिहासिक पुरुष के जीवन एवं योगदान के बारे में जान सकेंगे।
(लेखक डॉ. तरुण कुमार महतो, पटमदा इंटर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं वर्तमान में श्रीनाथ यूनिवर्सिटी में गणित विषय के विभागाध्यक्ष हैं)


