ओल चिकी लिपि शताब्दी वर्ष में संथाल समाज के गौरव सत्य नारायण मुर्मू हुए सम्मानित
Jamshedpur: संथाल समाज की पहचान और गौरव की प्रतीक ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 15–16 फरवरी को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में भव्य दो दिवसीय शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। ओल चिकी लिपि के जनक रघुनाथ मुर्मू द्वारा वर्ष 1925 में रचित इस लिपि ने संथाली भाषा को नई पहचान और सम्मान दिलाया है तथा संथाल समाज की सांस्कृतिक अस्मिता को मजबूत आधार प्रदान किया है। इस ऐतिहासिक समारोह का उद्घाटन भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ओल चिकी लिपि केवल एक लेखन प्रणाली नहीं है, बल्कि यह संथाल समाज की सांस्कृतिक पहचान, गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू के चित्र के साथ ओल चिकी लिपि से अंकित 100 रुपये का स्मारक सिक्का और 5 रुपये का विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया, जिससे पूरे देश के संथाल समाज में गर्व और उत्साह का माहौल देखा गया। कार्यक्रम में ओल चिकी लिपि के शिक्षण, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले 100 चयनित लोगों को सम्मानित करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि समय की कमी के कारण 16 फरवरी को राष्ट्रपति के हाथों केवल कुछ ही लोगों को सम्मानित किया जा सका, जबकि शेष लोगों को सम्मानित करने की जिम्मेदारी फागुन पत्रिका के आयोजकों को सौंपी गई।
इसी क्रम में झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला स्थित धाड़ दिशाेम माझी परगना महाल में आयोजित कार्यक्रम में फागुन पत्रिका की ओर से ओल चिकी लिपि के प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले समाजसेवियों और कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता सत्य नारायण मुर्मू को भी सर्टिफिकेट, मोमेंटो, डाक टिकट, फागुन पत्रिका और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद सत्य नारायण मुर्मू ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे संथाल समुदाय से आते हैं। उन्होंने कहा कि संथाल समाज का इतिहास बलिदान, संघर्ष और सांस्कृतिक गौरव से भरा हुआ है। समाज में तिलका माझी, सिदो मुर्मू, कान्हु मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरव मुर्मू, फूलो मुर्मू, झानो मुर्मू और रघुनाथ मुर्मू जैसे महान वीरों और समाज सुधारकों ने देश और समाज के लिए ऐतिहासिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आज उसी संथाल समाज से देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का होना पूरे आदिवासी समाज के लिए गर्व का विषय है। ऐसे महान पूर्वजों की विरासत वाले समाज से जुड़ा होना उनके लिए सम्मान की बात है और ओल चिकी लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मानित होना उनके जीवन का प्रेरणादायक क्षण है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और संथाल समाज का सम्मान है। यह उन्हें अपनी मातृभाषा, ओल चिकी लिपि और संथाल संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार के लिए और अधिक समर्पण और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है।





