करंट से झुलसे रातू को एमजीएम के डॉक्टरों ने दिया नया जीवन, कृत्रिम पैरों के सहारे फिर चलने लगा किशोर

Jamshedpur : महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बर्न यूनिट के चिकित्सकों ने एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण मामले में 13 वर्षीय किशोर रातू गागराई की जान बचाकर उसे दोबारा चलने में सक्षम बनाया है। चक्रधरपुर के गोपीनाथपुर (लोजोरा कलां) निवासी रातू सितंबर 2025 में 14 हजार वोल्ट के उच्च क्षमता वाले बिजली तार की चपेट में आ गया था। हादसे में उसका शरीर 60 से 70 प्रतिशत तक झुलस गया था। हादसे में रातू का चेहरा, बायां हाथ, दोनों पैर और पीठ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। गंभीर हालत में वह 23 सितंबर 2025 को एमजीएम अस्पताल पहुंचा, जहां वह बेहोशी की स्थिति में था और गंभीर रक्तस्रावी आघात से जूझ रहा था। बर्न यूनिट प्रभारी सह एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ललित मिंज के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। संक्रमण और ऊतकों के अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने के कारण दोनों पैरों को घुटने के नीचे से काटना पड़ा। इसके बाद सामने आई सबसे बड़ी चुनौती शरीर पर पर्याप्त स्वस्थ त्वचा की कमी थी।
मां की त्वचा से किया गया प्रत्यारोपण
रातू के गंभीर घावों को भरने के लिए चिकित्सकों ने एक विशेष पहल करते हुए उसकी मां बारीलता गागराई की त्वचा का उपयोग कर त्वचा प्रत्यारोपण किया। इस प्रक्रिया से खुले और गंभीर घावों को ढकने में मदद मिली और संक्रमण को नियंत्रित करने में सफलता मिली। इसके बाद लगातार उपचार, देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया जारी रही। लंबे उपचार के बाद रातू को कृत्रिम पैर लगाए गए। अब वह कृत्रिम पैरों के सहारे दोबारा चलने लगा है। उसे 29 जून 2026 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
चिकित्सकों और नर्सिंग टीम का अहम योगदान
इस जटिल उपचार में डॉ. ललित मिंज के नेतृत्व में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. गायत्री और डॉ. शरण्या, सहायक चिकित्सक डॉ. रितेश झा, डॉ. सोनाली, डॉ. बुलबुल सहित बर्न यूनिट और ऑपरेशन थिएटर के समस्त नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बुधवार को रातू अपने परिजनों के साथ एमजीएम अस्पताल पहुंचा और इलाज करने वाले चिकित्सकों से मुलाकात कर उनका आभार जताया। हादसे के बाद जिंदगी और मौत से जूझने वाले रातू का दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होना न केवल उसके परिवार के लिए बड़ी राहत है, बल्कि एमजीएम अस्पताल की चिकित्सा टीम के लिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।



