बल प्रयोग के बजाय संवाद को बनाया हथियार, पटमदा थाना प्रभारी ने टाला बड़ा टकराव
Patamda : नक्सलियों के खिलाफ सर्च अभियान के दौरान पुलिस एवं सुरक्षा बलों को ग्रामीणों द्वारा घेर लिए जाने की घटना में पटमदा थाना प्रभारी विष्णु चरण भोगता की सूझबूझ और संयम की खूब प्रशंसा हो रही है। शनिवार सुबह बाटालुका स्थित कितापाठ जाहेरथान के पास सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस को घेर लिया और तीन ग्रामीणों समेत पूर्व से हिरासत में लिए गए युधिष्ठिर महतो को छोड़ने की मांग पर अड़ गए। सुबह करीब पांच बजे भारी बारिश के बीच शुरू हुए विरोध के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। ग्रामीणों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। बताया जाता है कि भुईयांसिनान कैंप में तैनात कोबरा बटालियन के जवानों की ओर से भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन थाना प्रभारी विष्णु चरण भोगता ने इससे इनकार करते हुए संयम और संवाद का रास्ता अपनाया।
थाना प्रभारी ने जवानों से स्पष्ट कहा कि ग्रामीण अपने ही लोग हैं और उनके साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए। इसके बाद पुलिस ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी नाराजगी और भ्रम को दूर करने का प्रयास शुरू किया। करीब चार घंटे तक चले गतिरोध के दौरान थाना प्रभारी लगातार ग्रामीणों से संवाद करते रहे। इस बीच कुछ स्कूली छात्र भी थाना प्रभारी के समर्थन में सामने आए। छात्रों ने कहा कि वे अपने अभिभावकों के कहने पर वहां पहुंचे हैं। बाद में सारी, आमदापहाड़ी, बाटालुका और अपो गांव के ग्राम प्रधान भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि पिछले कई महीनों से थाना प्रभारी द्वारा पुलिस-पब्लिक रिलेशन रिफॉर्म के तहत ग्रामीणों के साथ लगातार बैठक और संवाद किए जाने का सकारात्मक असर इस दौरान देखने को मिला। जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस और ग्रामीणों के बीच गतिरोध खत्म कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि खगेंद्र नाथ सिंह और जिला पार्षद प्रदीप बेसरा के प्रयासों की भी सराहना की जा रही है। इस घटना के संबंध में थाना प्रभारी विष्णु चरण भोगता ने कहा कि ग्रामीणों के बीच कुछ भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसके कारण यह परिस्थिति बनी। आपसी संवाद के माध्यम से भ्रम को दूर कर स्थिति को सामान्य कर लिया गया।



