पोटका निवासी बांग्ला साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान व रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. सीआर लाहा का निधन, शोक की लहर
Jamshedpur : बांग्ला साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान, शिक्षाविद, साहित्यकार एवं रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. (प्रो.) चित्तरंजन लाहा का 19 सितंबर को 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से शिक्षा एवं साहित्य जगत में शोक की लहर है। परिवार, सहकर्मियों, विद्यार्थियों और परिचितों ने उनके निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की है।
10 जनवरी 1940 को पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका में एक संभ्रांत परिवार में जन्मे डॉ. लाहा ने अपना जीवन शिक्षा, साहित्य, शोध और ज्ञान-साधना को समर्पित किया। वे कुशल शिक्षक एवं प्रशासक होने के साथ बांग्ला भाषा-साहित्य के गंभीर अध्येता, शोधकर्ता, आलोचक और संपादक के रूप में भी विशिष्ट पहचान रखते थे। बांग्ला साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान में ‘बांग्ला नाटके ट्रेजेडी’, ‘बांग्ला नाटकेर तकनीक’, ‘एवं रवीन्द्रनाथ’, ‘साहित्येर पथे-प्रांते’, ‘मूल्यबोध ओ आधुनिक बांग्ला उपन्यास’, ‘धलभूमेर लोकगीत बंदना’ और ‘ब्याकरणबिचित्रा’ जैसी कृतियां शामिल हैं। नाटक, साहित्य-समालोचना, रवीन्द्र-अध्ययन, लोकसाहित्य, भाषा और आधुनिक उपन्यास जैसे विविध विषयों पर उनके शोध एवं लेखन ने अकादमिक जगत को समृद्ध किया। संपादन के क्षेत्र में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। उन्होंने ‘श्रीकृष्णकीर्तन—बंशीखंड एवं राधाविरह’ जैसी कृतियों का संपादन किया।
रांची विश्वविद्यालय के बांग्ला विभाग के अकादमिक विकास में भी डॉ. लाहा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभागीय पत्रिका के शुभारंभ का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। रांची विश्वविद्यालय के बांग्ला विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. (प्रो.) डीसी मल्लिक, डॉ. संतोष कुमार शिट तथा भागलपुर विश्वविद्यालय की बांग्ला विभागाध्यक्ष डॉ. शर्मिला बागची ने उनके निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि डॉ. लाहा का साहित्यिक अवदान, शोध-दृष्टि और शैक्षणिक योगदान लंबे समय तक स्मरण किया जाएगा।
परिजनों के अनुसार, डॉ. लाहा स्नेहशील, मार्गदर्शक और प्रिय व्यक्तित्व के धनी थे। वे अपने पीछे तीन पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। शिक्षा, बांग्ला भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनका निधन अपूरणीय क्षति है। उनकी ज्ञान-संपदा और साहित्यिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।




