पटमदा के ऐतिहासिक गांव कुमीर से जेटेट में शामिल होंगे 55 परीक्षार्थी
शिक्षा, स्वतंत्रता संग्राम और झारखंड आंदोलन में भी रही है गांव की विशिष्ट पहचान
Patamda : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में एक नवंबर को पटमदा प्रखंड के कुमीर गांव से 55 परीक्षार्थी शामिल होंगे। एक ही गांव से इतनी बड़ी संख्या में युवाओं के परीक्षा में शामिल होने को शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और बेहतर भविष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है। शिक्षक प्रबोध कुमार महतो ने सभी परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
शिक्षा और सरकारी सेवा में अलग पहचान
कुमीर गांव ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वर्तमान में गांव के करीब 25 लोग विभिन्न सरकारी पदों पर कार्यरत हैं। इनमें प्राथमिक एवं उच्च विद्यालयों के शिक्षक, केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक, पुलिसकर्मी, नर्स, डाक विभाग के कर्मचारी, व्याख्याता सहित विभिन्न विभागों के सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। गांव के युवाओं की ये उपलब्धियां नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
स्वतंत्रता संग्राम में दिया था बलिदान
कुमीर गांव का इतिहास शिक्षा और रोजगार तक ही सीमित नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी इस गांव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आठ अक्टूबर 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लक्ष्मण महतो ने अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इसके अलावा, गांव के कई स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और हजारीबाग सेंट्रल जेल भी गए थे।
झारखंड आंदोलन और राजनीति में भी योगदान
अलग झारखंड राज्य के गठन के आंदोलन में भी कुमीर गांव के दर्जनों आंदोलनकारियों ने भाग लिया था। राजनीतिक क्षेत्र में भी गांव की उल्लेखनीय पहचान रही है। स्वर्गीय घनश्याम महतो तीन बार मंत्री रह चुके थे। वहीं, पहले आम चुनाव से लेकर अब तक गांव के लोग विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़कर प्रखंड और जिला स्तर पर राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
सफलता की कामना
इस बार जेटेट में शामिल होने वाले गांव के सभी 55 परीक्षार्थियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। ग्रामीणों को आशा है कि परीक्षा में सफल होकर ये युवा शिक्षक बनेंगे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से समाज के विकास में योगदान देंगे। कुमीर गांव की यह उपलब्धि न केवल गांव, बल्कि पूरे पटमदा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
फोटो: फाइल












