बकरीद को लेकर बेलटांड़ में हुआ एक करोड़ का कारोबार, 1.01 लाख में बिका खस्सियों का जोड़ा

Patamda: मुस्लिम समुदाय के प्रमुख त्योहार बकरीद को लेकर रविवार को पटमदा के बेलटांड़ चौक स्थित साप्ताहिक हाट में खस्सी बाजार पूरी तरह गुलजार रहा। सुबह छह बजे से ही बाजार में खरीदारों और विक्रेताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जमशेदपुर समेत आसपास के विभिन्न इलाकों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने अपनी पसंद के खस्सियों की खरीदारी की। बाजार में दिनभर मोलभाव और खरीद-बिक्री का दौर चलता रहा। इस बार बाजार का सबसे महंगा सौदा बोड़ाम प्रखंड के बड़ासुसनी गांव के एक किसान ने किया। उनके द्वारा लाए गए खस्सियों के एक जोड़े की बिक्री 1 लाख 1 हजार रुपए में हुई, जो इस वर्ष के बाजार का सबसे ऊंचा मूल्य माना जा रहा है। इस खास जोड़े को देखने के लिए भी लोगों की भीड़ लगी रही।
बेलटांड़ बाजार में केवल पटमदा और बोड़ाम ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों से भी बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी पहुंचे थे। पशुपालकों ने बताया कि वे पूरे साल मेहनत कर खस्सियों को पालते हैं और बकरीद के अवसर पर उन्हें अच्छा बाजार मिल जाता है। यही वजह है कि इस पर्व का इंतजार ग्रामीण पशुपालक पूरे साल करते हैं। इस बार देशी खस्सियों की कीमत जीवित वजन के हिसाब से 500 से 550 रुपए प्रति किलो तक रही, जबकि लंबे कान वाली प्रजाति के खस्सियों की बिक्री लगभग 450 रुपए प्रति किलो की दर से हुई। बाजार में बड़े आकार और बेहतर नस्ल के खस्सियों की मांग सबसे अधिक देखी गई।
पाथरडीह निवासी हरि महतो ने बताया कि वे चार खस्सी लेकर बाजार पहुंचे थे और सभी की बिक्री 500 रुपए प्रति किलो से अधिक दर पर हुई। वहीं गौरडीह निवासी ताराचंद गोराई ने बताया कि उन्होंने डेढ़ साल तक मेहनत से पाले गए दो खस्सियों की बिक्री 500 रुपए प्रति किलो की दर से की। उन्होंने कहा कि पशुपालन में काफी समय, मेहनत और खर्च लगता है, लेकिन बकरीद के मौके पर अच्छा लाभ मिल जाता है।व्यापारियों और स्थानीय लोगों के अनुसार इस बार बेलटांड़ बाजार में एक करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है। बाजार में खरीदारी को लेकर इतनी भीड़ रही कि टाटा–पटमदा मुख्य सड़क पर कई घंटों तक जाम जैसी स्थिति बनी रही। हालांकि थाना प्रभारी विष्णुचरण भोगता के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन द्वारा की गई बेहतर यातायात व्यवस्था और निगरानी के कारण लोगों को अधिक परेशानी नहीं हुई। बकरीद और रोहिणी पर्व को लेकर सजे इस बाजार ने न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी, बल्कि क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल भी बना दिया।
