करम पर्व प्रकृति और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक : महाबीर मुर्मू
Jamshedpur: सीतारामडेरा में आदिवासी उरांव समाज की ओर से मंगलवार को लोकपर्व करम के अवसर पर करम अखाड़ा का आयोजन किया गया। इस दौरान क्षेत्र की बहन-बेटियों ने उपवास रखकर करम राजा की पूजा-अर्चना की तथा भाइयों की लंबी उम्र और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। करम अखाड़ा में पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार करम डाली की स्थापना की गई। करम गीतों और मांदर की थाप पर युवक-युवतियों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को उत्सवमय बना दिया। बुजुर्गों ने युवाओं को करम पर्व के महत्व के साथ जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश दिया।
कार्यक्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता महाबीर मुर्मू और पूर्व विधायक कुणाल षड़ंगी अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर महाबीर मुर्मू ने कहा कि करम पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, भाई-बहन के प्रेम और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि करम डाली की पूजा के माध्यम से बहनें भाइयों की लंबी उम्र के साथ समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। उन्होंने युवाओं द्वारा पारंपरिक नृत्य और करम गीत प्रस्तुत किए जाने पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यही हमारी संस्कृति और पहचान है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने, समाज को नशामुक्त रखने और बच्चों को शिक्षित करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ अपनी भाषा और संस्कृति को भी नहीं भूलना चाहिए।
महाबीर मुर्मू ने आयोजन के लिए करम अखाड़ा समिति के सदस्यों को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में राकेश उरांव, संतोष लकड़ा, खुदु उरांव, शालू उरांव, बंटी सिंह, अंकित सिंह, शंभू मुखी, मनोज तांती, दुर्गा प्रसाद हांसदा समेत अखाड़ा समिति के सदस्य एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।




