एनएमएल की प्रयोगशालाओं में विज्ञान से रूबरू हुए पटमदा के 50 आदिवासी विद्यार्थी
जनजातीय गौरव दिवस पर भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष और विरासत से हुए प्रेरित, आधुनिक विज्ञान, तकनीक और संवैधानिक अधिकारों की मिली जानकारी
Patamda : जनजातीय गौरव, सांस्कृतिक विरासत और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एसएस +2 हाई स्कूल, पटमदा के 50 आदिवासी विद्यार्थियों ने बुधवार को सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर का शैक्षणिक भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने यहां आयोजित जनजातीय गौरव दिवस-2026 कार्यक्रम में भाग लिया और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक की बारीकियों को करीब से समझा। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. मिथिलेश कुमार के नेतृत्व में पहुंचे विद्यार्थियों के साथ रितिका और गुंजन धान भी मौजूद रहीं।
भगवान बिरसा मुंडा की 151वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम की थीम ‘जनजातीय परंपरा, तकनीक और प्रकृति’ थी। इस दौरान विद्यार्थियों को जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही आदिवासी समुदाय के लिए संचालित सरकारी योजनाओं, संवैधानिक अधिकारों और संरक्षण संबंधी प्रावधानों से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को एनएमएल की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण कराया गया। यहां उन्होंने धातुओं के गुण, उनकी विभिन्न अवस्थाओं, उपयोग और धातुकर्म से जुड़ी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। प्रयोगशालाओं में अनुसंधान और तकनीकी गतिविधियों को करीब से देखकर विद्यार्थियों में विज्ञान एवं शोध के प्रति उत्सुकता बढ़ी।
प्राचार्य डॉ. मिथिलेश कुमार ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस केवल अपने गौरवशाली इतिहास और महान नायकों को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने का भी माध्यम है। भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष, स्वाभिमान और समाज के प्रति समर्पण विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थी अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आधुनिक वैज्ञानिक सोच और तकनीकी ज्ञान के सहारे भविष्य में नई ऊंचाइयां हासिल करें। विद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को किताबी शिक्षा के साथ वास्तविक जीवन और वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ने का अवसर भी मिले। उन्होंने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास, जिज्ञासा और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण मजबूत होता है। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए जनजातीय पहचान पर गर्व करने, अपने अधिकारों को समझने और विज्ञान एवं तकनीक की दुनिया से जुड़ने का प्रेरणादायक अनुभव साबित हुआ।












