ममता वाहन की बाध्यता खत्म, किसी भी वाहन से अस्पताल आने-जाने पर मिलेंगे 1000 रुपये
पहले ममता वाहन का इंतजार या उसी से सफर करने की थी मजबूरी
Jamshedpur : गर्भवती महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है। अब प्रसव के लिए अस्पताल जाने और प्रसव के बाद घर लौटने के लिए ममता वाहन का इस्तेमाल करना अनिवार्य नहीं होगा। महिलाएं ऑटो, निजी वाहन या किसी अन्य साधन से भी अस्पताल आ-जा सकेंगी। सरकार इसके लिए प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला को कुल 1000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। अब तक ममता वाहन योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को निर्धारित वाहन की सुविधा पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार गांवों और दूरदराज के इलाकों में ममता वाहन समय पर उपलब्ध नहीं होने, वाहन का इंतजार करने और आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने में देरी जैसी परेशानियां सामने आती थीं। कई महिलाओं को मजबूरी में दूसरे वाहनों से अस्पताल पहुंचना पड़ता था, जिससे उन्हें आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था। नई व्यवस्था से इन परेशानियों से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी नए निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि ममता वाहन के अलावा किसी भी अन्य वाहन से अस्पताल आने-जाने वाली पात्र महिलाओं को भी सहायता राशि मिलेगी। प्रसव के लिए घर से अस्पताल पहुंचने और प्रसव के बाद अस्पताल से घर लौटने के लिए कुल 1000 रुपये दिए जाएंगे।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के मातृत्व स्वास्थ्य कोषांग की नोडल पदाधिकारी ने 30 अक्टूबर को इस संबंध में सभी जिलों के सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिया है। योजना का लाभ लेने के लिए गर्भवती महिला के पास मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड (एमसीपी कार्ड) होना तथा मातृ एवं शिशु ट्रैकिंग सिस्टम (एमसीटीएस) में पंजीकरण अनिवार्य है। सरकार के इस फैसले से खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचने में सहूलियत मिलेगी।












