राज्य में 108 एंबुलेंस सेवा चरमराई: एंबुलेंस नहीं मिली, एमजीएम अस्पताल के गेट पर कार में ईचागढ़ की महिला ने दिया बच्ची को जन्म
मिलन चौक से 3500 रुपये खर्च कर निजी वाहन से पहुंचाया गया मरीज
Jamshedpur: राज्य की 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सामने आई है। समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड के सालुकडीह गांव की एक गर्भवती महिला को निजी वाहन से सोमवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाना पड़ा। अस्पताल पहुंचते ही प्रसव पीड़ा इतनी तेज हो गई कि महिला ने अस्पताल के मुख्य गेट पर खड़ी स्कॉर्पियो के अंदर ही एक बच्ची को जन्म दे दिया।
घटना सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे की है। जानकारी के अनुसार दीपाली महतो को पहले तिरूलडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया। परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। मजबूरन परिवार को करीब 3500 रुपये खर्च कर निजी स्कॉर्पियो वाहन की व्यवस्था करनी पड़ी।
एमजीएम अस्पताल पहुंचते ही महिला की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई और अस्पताल के गेट पर ही वाहन के अंदर सुरक्षित प्रसव हो गया। अचानक हुई इस घटना से अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड जवान मौके पर पहुंचे और तत्काल एएनएम को बुलाया। एएनएम ने प्राथमिक देखभाल के बाद जच्चा और नवजात बच्ची को अस्पताल के लेबर रूम में भर्ती कराया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है। यह घटना राज्य की 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए शुरू की गई यह आपातकालीन सेवा समय पर उपलब्ध नहीं होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी आर्थिक बोझ उठाने के साथ-साथ जान जोखिम में डालकर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में कोई जटिलता उत्पन्न हो जाती, तो मां और नवजात दोनों की जान खतरे में पड़ सकती थी। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन एंबुलेंस सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता की ओर स्पष्ट संकेत करती है।



